प्रकाशित समय : सुबह
कूबरखा: हाल ही में संपन्न हुए एक व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility study) के अनुसार, कूबरखा के पास ‘पोर्ट ऑफ एंगकुरा’ (Port of Ngqura) में समुद्री लहरों की शक्ति का उपयोग करके लगभग 5,200 घरों के लिए पर्याप्त स्वच्छ बिजली उत्पन्न की जा सकती है।
स्वीडिश कंपनी ‘इको वेव पावर’ (Eco Wave Power) और ‘अफ्रीका ग्रेट फ्यूचर डेवलपमेंट लिमिटेड’ (AGFDL) द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि इस क्षेत्र के ब्रेकवाटर इंफ्रास्ट्रक्चर (समुद्री लहरों को रोकने वाली दीवार) पर लगभग 8.3 मेगावाट (MW) की स्थापित क्षमता वाला ‘वेव एनर्जी पावर स्टेशन’ लगाया जा सकता है।

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अध्ययन के मुख्य बिंदु:
- बिजली उत्पादन: पोर्ट ऑफ एंगकुरा में लहरों की स्थिति इतनी अनुकूल है कि यहाँ से 8.3 मेगावाट तक बिजली पैदा की जा सकती है। यह क्षमता दक्षिण अफ्रीका के औसत उपभोग के अनुसार लगभग 5,200 घरों की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
- मौजूदा ढांचे का उपयोग: इस परियोजना की खासियत यह है कि यह समुद्र में नए निर्माण के बजाय बंदरगाह के मौजूदा ढांचे (ब्रेकवाटर) का उपयोग करेगी, जिससे लागत कम होगी और समुद्री पर्यावरण पर प्रभाव भी न्यूनतम रहेगा।
- ऊर्जा संकट का समाधान: दक्षिण अफ्रीका वर्तमान में बिजली की कमी और लोड-शेडिंग की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में समुद्री लहरों जैसी नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का विकल्प देश के ऊर्जा संकट को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय: इको वेव पावर की संस्थापक और सीईओ, इन्ना ब्रेवरमैन (Inna Braverman) ने कहा, “यह अध्ययन अफ्रीकी बाजार में हमारे प्रवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। नतीजे बताते हैं कि पोर्ट ऑफ एंगकुरा में सार्थक क्षमता है, और हम इसे अफ्रीका के पहले वेव पावर स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए उत्साहित हैं।”
AGFDL के सीईओ विल्फ्रेड इमैनुएल-गॉटलिब ने कहा कि यह अध्ययन आगे की चर्चाओं के लिए एक ठोस तकनीकी आधार प्रदान करता है। अब अगले चरणों में परियोजना की संरचना और नियामक अनुमतियों पर काम किया जाएगा।
आगे की राह: इस सफल अध्ययन के बाद, अब पूर्वी लंदन (East London) के पास भी ऐसे ही दूसरे पावर स्टेशन के लिए स्थानों का आकलन शुरू कर दिया गया है। दक्षिण अफ्रीका की 2,800 किलोमीटर लंबी तटरेखा इसे लहरों से बिजली बनाने के लिए दुनिया के सबसे उपयुक्त देशों में से एक बनाती है।
यह परियोजना न केवल स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और तकनीकी विकास में भी सहायक होगी।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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