प्रकाशित समय : सुबह
मेरठ। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बहुप्रतीक्षित पांचवें फेज के निर्माण में एक बार फिर देरी हो गई है। यह चरण दिसंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण की समस्याओं और किसानों के विरोध के कारण निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार अब यह चरण मार्च 2026 से पहले चालू होने की संभावना नहीं है — यानी परियोजना करीब 7 से 8 महीने और पीछे खिसक गई है।
क्यों हो रही है देरी?
इस परियोजना में देरी का मुख्य कारण मेरठ के खानपुर और शाकरपुर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहा विवाद है। किसान मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं हैं और कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं। इसी कारण लोहियानगर पर प्रस्तावित एक बड़े इंटरचेंज का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। यह इंटरचेंज मेरठ-हापुड़-बुलंदशहर हाईवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बताया जा रहा है कि इस फेज का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन शेष 20 प्रतिशत कार्य भूमि विवाद और मुआवजे के अनसुलझे मामलों के चलते रुका हुआ है।
क्या है यह 5वां फेज?
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का यह पांचवां चरण एक 14 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे है। यह मेरठ-बुलंदशहर हाईवे के शाकरपुर को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के जैनुद्दीनपुर से जोड़ेगा।
यह खंड शाकरपुर, नरहैड़ा, ढकौली, सलेमपुर, चंदसारा, खानपुर, नगलापातू, चूड़ियाला, तल्हैटा और जैनुद्दीनपुर जैसे कई गांवों से होकर गुजरेगा।
इस परियोजना की शुरुआती लागत ₹309 करोड़ थी, जो अब बढ़कर ₹400 करोड़ से अधिक हो गई है।
किन इलाकों को होगा फायदा?
पांचवें फेज के पूरा होने से मेरठ के हजारों आम नागरिकों को राहत मिलेगी। विशेष रूप से इन इलाकों के लोग लाभान्वित होंगे:
- लोहियानगर
- कांशीराम कॉलोनी
- शास्त्रीनगर
- जागृति विहार
- काजीपुर
- नरहैड़ा
- सलेमपुर
- जुरानपुर
इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए दिल्ली, हापुड़ और हरिद्वार का सफर काफी सुगम और तेज हो जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे से होगा सीधा कनेक्शन
यह फेज पूरा होने के बाद दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के लोग सीधे प्रयागराज तक एक्सप्रेसवे से यात्रा कर सकेंगे। जैनुद्दीनपुर के पास एक 14 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक जाती है।
सांसद ने जताई थी चिंता
इससे पहले, मार्च 2025 में मेरठ के सांसद अरुण गोविल ने NHAI चेयरमैन संतोष कुमार यादव और प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद कुमार से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की थी। सांसद ने 5वें फेज की धीमी प्रगति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि पहले चार चरण तेज गति से पूरे हुए, लेकिन पांचवें में रुचि की कमी दिखती है।
उस समय NHAI चेयरमैन ने भरोसा दिलाया था कि दिसंबर 2025 तक काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन वह समयसीमा भी पूरी नहीं हो सकी।
कब से चल रहा है यह प्रोजेक्ट?
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसंबर 2015 में शुरू हुआ था। पहले चार चरण अपेक्षाकृत समय पर पूरे हो गए और अप्रैल 2021 में एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए खोल दिया गया। इससे दिल्ली-मेरठ का सफर ढाई घंटे से घटकर मात्र 60 मिनट का हो गया। लेकिन पांचवें फेज की तस्वीर बिल्कुल अलग रही — यह प्रोजेक्ट मार्च 2024 की समयसीमा से लेकर अब तक कई बार लटक चुका है।
आगे क्या?
अधिकारियों के मुताबिक शेष भूमि अधिग्रहण के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। मार्च 2026 तक इस फेज को पूरा करने का नया लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक बार यह फेज चालू हो जाए तो लाखों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और मेरठ क्षेत्र का दिल्ली के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी सीधा संपर्क स्थापित होगा।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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