महीनों से समुद्र में भटक रहे रूसी तेल जहाज अब लौट रहे हैं भारत की ओर — ईरान युद्ध के बीच बदला पूरा खेल

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प्रकाशित समय : सुबह

ईरान में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के छठे दिन, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल के बीच एक बड़ा बदलाव सामने आया है। जहाज ट्रैकिंग फर्मों Kpler और Vortexa के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी एशिया की ओर जाते दिख रहे रूसी कच्चे तेल से लदे कम से कम दो — और संभवतः तीन — बड़े टैंकरों ने अचानक रास्ता बदलकर भारत का रुख कर लिया है।

यह संकेत है कि नई दिल्ली एक बार फिर रूसी यूराल ग्रेड तेल की खरीद की ओर लौट रही है, जिसे उसने अमेरिकी दबाव में हाल के महीनों में काफी कम कर दिया था।

रूसी तेल टैंकर जहाज अरब सागर में भारत की तरफ जाते हुए, पृष्ठभूमि में मध्य-पूर्व का नक्शा और जलते तेल कुएं, ऊपर लिखा है "रूसी तेल फिर आएगा भारत"
ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल टैंकर ‘ओड्यून’, ‘मतारी’ और ‘इंड्री’ ने रास्ता बदला — अब भारत के पारादीप और वडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं 21.6 लाख बैरल से अधिक यूराल कच्चा तेल। 📍 Source: Kpler & Vortexa, 6 मार्च 2026

कौन-से जहाज और कितना तेल?

ताज़ा ट्रैकिंग डेटा के अनुसार तीन प्रमुख टैंकर इस बदलाव के केंद्र में हैं:

🛢️ ओड्यून (Odune) — सूएजमैक्स टैंकर

करीब 7,30,000 बैरल यूराल तेल लेकर 4 मार्च को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा। यह जहाज पहले पूर्वी एशिया की ओर जाता दिख रहा था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तेल उतारने की प्रक्रिया पूरी हुई है या नहीं।

🛢️ मतारी (Matari) — अफ्रामैक्स टैंकर

7,00,000 से अधिक बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर 5 मार्च को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचना था। दोनों जहाजों को मिलाकर करीब 14 लाख बैरल तेल इस सप्ताह भारतीय बंदरगाहों पर उतरने की उम्मीद है।

🛢️ इंड्री (Indri) — सूएजमैक्स टैंकर

करीब 7,30,000 बैरल यूराल तेल लेकर अरब सागर में था। इसने पहले सिंगापुर को गंतव्य दिखाया था, लेकिन इस सप्ताह अचानक उत्तर की ओर मुड़कर भारत की दिशा में बढ़ गया। यदि यह भी भारत आता है तो कुल आपूर्ति 21.6 लाख बैरल से अधिक हो जाएगी।

⚠️ महत्वपूर्ण: ये तीनों जहाज — ओड्यून, मतारी और इंड्री — पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किए गए थे। इसके बावजूद भारत इनसे तेल खरीद रहा है।


क्यों बदला भारत का रुख?

जनवरी-फरवरी 2026 में भारत ने अमेरिकी दबाव और ट्रंप-मोदी व्यापार समझौते की वार्ताओं को देखते हुए रूसी तेल आयात में भारी कटौती की थी। फरवरी में रूसी तेल आयात घटकर करीब 8,59,000 बैरल प्रतिदिन रह गया — जो जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर था और पिछली गर्मियों की तुलना में लगभग 40% कम। इस कटौती के चलते रूस को अपने खरीदार चीन में तलाशने पड़े।

लेकिन मध्य-पूर्व में छिड़े युद्ध ने समीकरण पलट दिए। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के बाद खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति ठप पड़ गई। भारत सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने संकेत दिया कि यदि संघर्ष 10-15 दिनों से अधिक चला तो वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशना अनिवार्य होगा।


भारत की तेल भंडारण क्षमता और असली चुनौती

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। देश के पास कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार केवल करीब 25 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है। इसके अलावा भारतीय रिफाइनरियों के पास डीजल, पेट्रोल और एलपीजी का भंडार भी सीमित है।

ऐसे में आपूर्ति में कोई भी लंबी रुकावट देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।


95 लाख बैरल और आ सकता है — Reuters रिपोर्ट

Reuters ने उद्योग सूत्रों के हवाले से बताया है कि करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल ऐसे जहाजों में मौजूद है जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के निकट हैं। सूत्र के अनुसार ये कार्गो कुछ ही हफ्तों के भीतर भारत पहुंच सकते हैं, जिससे रिफाइनरियों को तत्काल राहत मिल सकती है।

हालांकि सूत्र ने यह बताने से इनकार कर दिया कि ये जहाज मूल रूप से कहां जाने वाले थे।

अमेरिकी दबाव बनाम ऊर्जा सुरक्षा — भारत की दुविधा

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीद रोकने का दबाव बनाए रखा है और टैरिफ की धमकियां भी दी हैं। लेकिन मध्य-पूर्व संकट ने नई दिल्ली को एक कठिन विकल्प के सामने खड़ा कर दिया है —

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फिलहाल आंकड़े बता रहे हैं कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।


📋 संक्षेप में — मुख्य तथ्य

तथ्यविवरण
टैंकरओड्यून, मतारी, इंड्री (तीनों UK/EU प्रतिबंध सूची में)
कुल संभावित आपूर्ति21.6 लाख बैरल+ इस सप्ताह
बंदरगाहपारादीप (ओडिशा), वडिनार (गुजरात)
फरवरी आयात8,59,000 बैरल/दिन — जून 2022 के बाद सबसे कम
गिरावटपिछली गर्मियों की तुलना में ~40% कम
अतिरिक्त स्टॉक~95 लाख बैरल भारतीय समुद्र के पास
भारत का भंडारकेवल ~25 दिनों की मांग के बराबर

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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