रेवाड़ी और अंबाला में बनेंगे नए मिल्क प्लांट — 600 करोड़ का निवेश

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प्रकाशित समय : सुबह

हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर वित्त मंत्री बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि रेवाड़ी और अंबाला में 300-300 करोड़ रुपए की लागत से दो नए अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस तरह कुल निवेश 600 करोड़ रुपए का होगा।

दोनों प्लांटों की प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता 5-5 लाख लीटर रखी जाएगी। ये प्लांट आधुनिक स्काडा (SCADA — सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) तकनीक पर आधारित होंगे, जिससे उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित, सुरक्षित और दक्ष बनेगी। यह प्रणाली वास्तविक समय में डेटा संग्रहण और निगरानी की सुविधा देती है।

हरियाणा के रेवाड़ी और अंबाला में प्रस्तावित नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का प्रतीकात्मक चित्र, 600 करोड़ रुपए निवेश योजना 2026।
रेवाड़ी और अंबाला में 600 करोड़ की लागत से बनेंगे दो नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट — हरियाणा डेयरी क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत।

रेवाड़ी जिले के बावल में स्थापित होने वाला यह मिल्क प्लांट हरियाणा का सातवां और अब तक का सबसे बड़ा डेयरी प्लांट होगा। रेवाड़ी की भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है — यह जिला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और साइबर सिटी गुरुग्राम से सटा हुआ है, जहां हरियाणा की देसी नस्ल की गाय और भैंस के दूध की भारी मांग रहती है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर को दूध की आपूर्ति बल्लभगढ़ प्लांट से होती है। नया बावल प्लांट आने से न केवल आपूर्ति क्षमता बढ़ेगी, बल्कि परिवहन समय और लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

इस परियोजना से 1,200 से 1,600 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा आसपास के 25-30 किलोमीटर क्षेत्र के 7 से 8 हजार किसानों को अपने दूध की बिक्री के लिए एक बड़ा और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मिलेगा। रेवाड़ी जिले का कुल दूध उत्पादन 4.34 लाख टन है, जो राज्य के कुल उत्पादन का 3.73% है। बकरी दूध उत्पादन में यह जिला राज्य में पांचवें स्थान पर है, जो कुल उत्पादन का 8% हिस्सा है।

हरियाणा में डेयरी प्लांटों की स्थापना का सिलसिला दशकों पुराना है। 1970-72 में जींद में पहला प्लांट (1.50 लाख लीटर/दिन), 1973-74 में अंबाला में दूसरा (1.40 लाख लीटर/दिन), 1976-77 में रोहतक में तीसरा (4 लाख लीटर/दिन), 1979-80 में बल्लभगढ़ में चौथा (1.25 लाख लीटर/दिन), 1996-97 में सिरसा में पांचवां (1.10 लाख लीटर/दिन) और 2014-15 में कुरुक्षेत्र में छठा प्लांट (20,000 लीटर/दिन) बना। अब रेवाड़ी के बावल में सातवां और अंबाला में आठवां प्लांट स्थापित होगा।

हरियाणा सरकार ने इस बजट में डेयरी और कृषि क्षेत्र के लिए अनेक अन्य घोषणाएं भी की हैं। करनाल में NABL प्रमाणित दूध व खाद्य परीक्षण लैब की स्थापना होगी, 8 नई फूड टेस्टिंग लैब पूरे प्रदेश में खोली जाएंगी, 10 करोड़ रुपए की लागत से 100 पशुओं की क्षमता वाले आधुनिक डेयरी फार्म बनाए जाएंगे, 7 नए पशु औषधालय और 4 नए राजकीय पशु चिकित्सालय खुलेंगे, सिरसा में जूस प्रसंस्करण प्लांट लगाया जाएगा और मत्स्य किसानों के लिए यमुनानगर, रोहतक व फरीदाबाद में 9 करोड़ की लागत से मृदा-जल परीक्षण लैब स्थापित होंगी।

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 2,23,658.17 करोड़ रुपए का कुल बजट पेश करते हुए स्पष्ट किया कि यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 10.28% अधिक है। उन्होंने जोर दिया कि रेवाड़ी और अंबाला के नए मिल्क प्लांट न केवल डेयरी उद्योग को मजबूत करेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे — किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, प्रसंस्करण और पैकेजिंग आधुनिक होगी, और हजारों युवाओं को रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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