ईरान-इज़रायल युद्ध का असर: भारत में LPG संकट और प्लास्टिक उद्योग ठप

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दिनांक: 31 मार्च 2026

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए। ईरान-इज़रायल युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा खामियाजा भारत की ऊर्जा आपूर्ति को भुगतना पड़ रहा है। हमले के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।

यह वही संकरा समुद्री रास्ता है जिससे भारत का 90% LPG आयात गुजरता है। इस एक कदम ने पूरे भारत की ऊर्जा और विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है।

संकट की जड़: होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी

भारत हर साल करीब 3.13 करोड़ मीट्रिक टन LPG की खपत करता है, जिसका 60-62% हिस्सा आयात से आता है — खासकर सऊदी अरब, UAE, कतर और कुवैत से। जैसे ही होर्मुज बंद हुआ, साप्ताहिक आयात में एक झटके में 30% की गिरावट आ गई और टैंकरों पर युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम 500% से अधिक बढ़ गया।

भारत में LPG संकट: सरकार का तत्काल हस्तक्षेप

केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कदम उठाए हैं:

  • 8 मार्च 2026: LPG नियंत्रण आदेश जारी किया गया, जिसमें सभी रिफाइनरियों को अपना पूरा C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम (प्रोपेन, ब्यूटेन) घरेलू रसोई गैस उत्पादन में लगाने का निर्देश दिया गया। इससे मात्र 5 दिनों में घरेलू LPG उत्पादन 28% बढ़ गया।
  • 9 मार्च 2026: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया। गैस वितरण की प्राथमिकता तय की गई — पहले घरेलू उपभोक्ता, बाद में उद्योग।
  • 7 मार्च 2026: दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के LPG सिलेंडर की कीमत ₹60 बढ़ाकर ₹913 कर दी गई।
  • 27 मार्च 2026: पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क ₹13/लीटर से घटाकर ₹3/लीटर कर दिया गया ताकि आम उपभोक्ता को राहत मिल सके।
ईरान-इज़रायल युद्ध का असर: भारत में LPG संकट (2026)

https://www.bhaskar.com/g/national/news/iran-israel-us-war-impact-commercial-lpg-shortage-plastic-units-shut-prices-rise-137576082.html

कमर्शियल LPG संकट: होटल, रेस्तरां और उद्योग बेहाल

सरकार ने घरों को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्र की LPG आपूर्ति शुरुआत में 80% तक काट दी। इसका व्यापक असर पड़ा:

1. होटल और रेस्तरां उद्योग

  • महाराष्ट्र के ठाणे में अकेले 800 से अधिक होटल और रेस्तरां बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
  • Hotel and Restaurant Association (Western India) ने महाराष्ट्र सरकार से लाइसेंस शुल्क में एक महीने की छूट मांगी है, क्योंकि करीब 30-35% होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं।
  • दिल्ली के होटलों ने मेन्यू में से धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजन हटा दिए हैं और हाई कोर्ट की कैंटीन ने भी मुख्य व्यंजन परोसना बंद कर दिया है।
  • आंध्र प्रदेश में होटल मालिकों ने बताया कि सिलेंडर की उपलब्धता 40-50% घट गई है।

2. अन्य प्रभावित क्षेत्र

  • पुणे में गैस-चालित शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।
  • लॉन्ड्री, बेकरी, सामुदायिक रसोई और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने उत्पादन घटाया।
  • भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों के कैटरर्स को वैकल्पिक ईंधन तलाशने की सलाह दी।

मोरबी सिरेमिक उद्योग: 450 फैक्टरियां ठप

गुजरात का मोरबी, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक टाइल उत्पादन केंद्र है, इस संकट से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

  • कुल 670 फैक्टरियों में से 450 से अधिक बंद हो गई हैं।
  • मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अनुसार, पहले प्रोपेन गैस से चलने वाली इकाइयां बंद हुईं, फिर प्राकृतिक गैस पर निर्भर इकाइयां भी ठप हो गईं।
  • करीब 430 इकाइयों ने 10-15 अप्रैल तक संयुक्त रूप से बंद रहने का निर्णय लिया है।

प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग पर ईरान-इज़रायल युद्ध का असर

ईरान-इज़रायल युद्ध का सबसे गंभीर आर्थिक असर प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र पर पड़ा है:

  • नेफ्था (प्लास्टिक बनाने का प्रमुख कच्चा माल) की कीमतें युद्ध के बाद से 74% बढ़ गई हैं।
  • पॉलिमर की कीमतें वैश्विक स्तर पर 41-42% बढ़ी हैं।
  • भारत में पॉलीबैग की कीमतें नेफ्था लागत के कारण 80% तक उछल गई हैं।
  • कच्चे तेल की कीमतें $100-$120 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं।
  • पैकेजिंग उद्योग भारी लागत दबाव में है, जिससे खाद्य एवं पेय पदार्थ कंपनियों की पैकेजिंग लागत तेज़ी से बढ़ रही है।

डेयरी उद्योग पर खतरा

LPG की कमी अब डेयरी क्षेत्र तक पहुंच गई है:

  • महाराष्ट्र के डेयरी मालिकों ने चेताया है कि देश में दूध पैकेजिंग का स्टॉक केवल 10 दिन का बचा है।
  • गुजरात में दूध प्रसंस्करण इकाइयों की LPG आपूर्ति 40% काटी गई।
  • LPG-चालित पाश्चुरीकरण और प्लास्टिक पाउच उत्पादन — दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

ताज़ा स्थिति: सरकार ने बढ़ाई कमर्शियल आपूर्ति

30 मार्च 2026 तक की ताज़ा जानकारी के अनुसार:

  • सरकार ने कमर्शियल LPG आपूर्ति को युद्ध-पूर्व स्तर के 70% तक बहाल कर दिया है।
  • रेस्तरां, ढाबे, डेयरी और सामुदायिक रसोई के लिए अतिरिक्त 20% आवंटन की घोषणा की गई है।
  • सभी कमर्शियल उपभोक्ताओं को PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति सामान्य बनी हुई है (बुकिंग से डिलीवरी तक 2.5 दिन)।
  • अमेरिका के साथ 22 लाख टन प्रतिवर्ष का नया LPG आपूर्ति समझौता किया गया है।

महंगाई पर असर

  • ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण CPI महंगाई दर फरवरी की 3.21% से बढ़कर 4.2-4.5% तक पहुंच सकती है।
  • सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMC) को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ₹30,000 करोड़ और अलग से ₹17,500 करोड़ का पैकेज मंजूर किया है।
  • इस पूरे राजकोषीय हस्तक्षेप का वार्षिक अनुमानित बोझ लगभग ₹1.55 लाख करोड़ ($16.3 अरब) है।

निष्कर्ष: आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खुलता, भारत में LPG की तंगी कई वर्षों तक बनी रह सकती है। भारत के लिए यह संकट एक बड़ी सीख है। भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना, PNG नेटवर्क का विस्तार, और आयात स्रोतों में विविधता लाना बेहद जरूरी हो गया है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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