प्रकाशन तिथि: 24 मार्च 2026
मुख्य बातें
- तेल कंपनियाँ 14.2 किलो के सिलेंडर में केवल 10 किलो एलपीजी भरने पर विचार कर रही हैं
- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित, आपूर्ति प्रभावित
- भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है
- सरकार ने इस योजना को “अत्यधिक अटकलबाजी” करार दिया
क्या है पूरा मामला?
देश में एलपीजी यानी रसोई गैस की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास, ने भारत की रसोई गैस आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस संकट से निपटने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) — एक असाधारण कदम पर विचार कर रही हैं।

होर्मुज संकट से भारत की रसोई पर खतरा | जानें क्या है 10 KG प्रस्ताव और आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।
प्रस्ताव यह है कि मानक 14.2 किलो के सिलेंडर में अब केवल 10 किलो एलपीजी भरी जाए। इसका मकसद उपलब्ध स्टॉक को अधिक से अधिक घरों तक पहुँचाना है।
क्यों पड़ी यह नौबत?
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। मार्च 2026 की शुरुआत से इस जलमार्ग में भारी बाधा आई है, जिससे एलपीजी टैंकरों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
ईरान ने इस रास्ते को केवल “मित्र देशों” के लिए खुला रखने की घोषणा की है। फारस की खाड़ी में छह भारतीय एलपीजी टैंकर होर्मुज पार करने के इंतजार में फंसे हैं।
भारत की आयात निर्भरता
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, और इस आयात का लगभग 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता था। इस संकट ने देश की आपूर्ति व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है।
गिरती खपत से मिल रहे संकेत
मार्च 2026 के पहले पखवाड़े में देश में एलपीजी की खपत में करीब 17% की गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति को “चिंताजनक” बताया है।
10 किलो सिलेंडर प्रस्ताव: कैसे काम करेगा?
| विवरण | मौजूदा व्यवस्था | प्रस्तावित व्यवस्था |
|---|---|---|
| सिलेंडर में गैस | 14.2 किलो | 10 किलो |
| औसत उपयोग अवधि | 35–40 दिन | लगभग 30 दिन |
| सिलेंडर का आकार | वही रहेगा | वही रहेगा |
| कीमत | मौजूदा दर | संशोधित (कम) होगी |
इस योजना के तहत:
- सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होगी, केवल उसमें कम गैस भरी जाएगी
- बॉटलिंग प्लांट्स को अपने वजन मापने के सिस्टम को फिर से कैलिब्रेट करना होगा
- सिलेंडर पर नया स्टिकर लगाकर कम मात्रा की जानकारी दी जाएगी
- कीमतों में भी उसी अनुपात में कटौती की जाएगी
आम उपभोक्ता पर क्या असर होगा?
सीधे फायदे
- हर सिलेंडर की कीमत अपेक्षाकृत कम होगी
- कम से कम गैस की आपूर्ति तो बनी रहेगी
संभावित परेशानियाँ
- सिलेंडर जल्दी खत्म होने से रिफिल की जरूरत ज्यादा बार पड़ेगी
- डिस्ट्रीब्यूटर्स पर दबाव बढ़ेगा
- मासिक खर्च बढ़ सकता है
- उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है
व्यावसायिक उपभोक्ता भी प्रभावित
यह संकट केवल घरों तक सीमित नहीं है। सरकार पहले ही रेस्तरां, होटल और छोटे व्यवसायों को मिलने वाले व्यावसायिक एलपीजी आवंटन में कटौती कर चुकी है। हालांकि बाद में पूर्व-संकट आवंटन का 40-50% बहाल किया गया, फिर भी आपूर्ति तंग बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट को “अत्यधिक अटकलबाजी” बताते हुए स्पष्ट किया है कि मौजूदा वितरण प्रणाली में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही सरकार ने कई आपातकालीन कदम भी उठाए हैं:
- रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं, जिससे उत्पादन में 25% की वृद्धि हुई है
- अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है
- नागरिकों से एलपीजी की पैनिक बुकिंग से बचने की अपील की गई है
देश में एलपीजी का वर्तमान परिदृश्य
- भारत में कुल सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता: 32.94 करोड़ (मार्च 2025 तक)
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जुड़े परिवार: 10 करोड़ से अधिक
- देश की दैनिक एलपीजी जरूरत (घरेलू): लगभग 80,400 टन
- व्यावसायिक मांग मिलाकर कुल दैनिक जरूरत: लगभग 93,500 टन
- पिछले एक दशक में एलपीजी खपत में वृद्धि: 74%
निष्कर्ष
होर्मुज संकट ने भारत की एलपीजी आपूर्ति की कमजोरी उजागर कर दी है। 14.2 किलो के सिलेंडर में 10 किलो गैस भरने का प्रस्ताव एक अस्थायी राहत उपाय हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए आयात स्रोतों का विविधीकरण और घरेलू उत्पादन में वृद्धि जरूरी है। फिलहाल सरकार ने इस बदलाव को लागू नहीं किया है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!
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