प्रकाशित समय : सुबह
विजय, त्रिशा और प्रकाश राज की वो फिल्म जो आज भी दिलों पर राज करती है
17 अप्रैल 2004 को तमिल सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा। धरनी द्वारा निर्देशित और ए.एम. रत्नम द्वारा निर्मित घिल्ली ने रिलीज़ के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। तेलुगु सुपरहिट ओक्काडू (2003) की यह रीमेक फिल्म, विजय और त्रिशा की जोड़ी के साथ एक ऐसी धमाकेदार एक्शन फिल्म बनकर सामने आई जिसे दर्शकों ने खुले दिल से स्वीकार किया।
कहानी: एक कबड्डी खिलाड़ी का प्यार और जंग
फिल्म की कहानी चेन्नई के एक युवा कबड्डी खिलाड़ी सरवणवेलु उर्फ ‘वेलु’ (विजय) के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके पिता, डीसीपी शिवसुब्रमण्यम, उसके खेल के प्रति जुनून को पसंद नहीं करते। मदुरै में एक टूर्नामेंट के दौरान, वेलु की मुलाकात धनलक्ष्मी (त्रिशा) से होती है — जो मुथुपांडी (प्रकाश राज) नामक एक खतरनाक और दबंग गैंगस्टर के चंगुल से बचना चाहती है। मुथुपांडी उसे जबरदस्ती अपनी पत्नी बनाना चाहता है।

वेलु धनलक्ष्मी को बचाने के लिए मुथुपांडी से टकरा जाता है और फिर शुरू होती है चेन्नई और मदुरै के बीच रोमांच, एक्शन और प्यार से भरी एक अविस्मरणीय भागदौड़ की दास्तान।
स्टारकास्ट और टीम
मूल रूप से यह भूमिका विक्रम और ज्योतिका के लिए सोची गई थी, लेकिन उनकी व्यस्तताओं के चलते विजय और त्रिशा को लिया गया। अजित कुमार को भी मुख्य भूमिका के लिए विचार किया गया था, पर वे तेलुगु रीमेक करने से झिझके। प्रकाश राज ने ओक्काडू से ही अपनी भूमिका दोहराई और खलनायक ‘मुथुपांडी’ के रूप में उन्होंने ऐसा दमदार किरदार गढ़ा जो आज भी लोगों की जुबान पर है।
| भूमिका | कलाकार |
|---|---|
| वेलु (नायक) | विजय |
| धनलक्ष्मी (नायिका) | त्रिशा |
| मुथुपांडी (खलनायक) | प्रकाश राज |
| संगीत | विद्यासागर |
| सिनेमेटोग्राफी | गोपीनाथ |
| संपादन | वी.टी. विजयन, बी. लेनिन |
| नृत्य निर्देशन | राजू सुंदरम |
| स्टंट कोरियोग्राफी | रॉकी राजेश |
बॉक्स ऑफिस: 2004 की सबसे बड़ी तमिल फिल्म
रिलीज़ के साथ ही ‘घिल्ली’ दर्शकों की दीवानगी का शिकार हो गई। फिल्म ने 200 से ज़्यादा दिनों तक सिनेमाघरों में अपना झंडा बुलंद रखा। ₹36–42 करोड़ की विश्वव्यापी कमाई के साथ यह 2004 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्म बन गई। अकेले कोयम्बटूर में फिल्म ने ₹2.05 करोड़ की कमाई की।
आलोचनात्मक प्रतिक्रिया
फिल्म को आम तौर पर सकारात्मक समीक्षाएं मिलीं:
- Sify — 5/5 ⭐
- IANS — 3/5 ⭐
- The Hindu ने लिखा कि यह फिल्म एक स्पष्ट विजेता है
हालांकि कुछ आलोचकों ने इसे केवल विजय के दीवाने प्रशंसकों के लिए उपयुक्त बताया।
सांस्कृतिक प्रभाव और विरासत
प्रकाश राज के किरदार ‘मुथुपांडी’ की अपार लोकप्रियता ने कई पैरोडी को जन्म दिया। उनका “चेल्लम” (जिस तरह वे धनलक्ष्मी को पुकारते हैं) शब्द सोशल मीडिया पर दुश्मन को व्यंग्यात्मक रूप से संबोधित करने का तरीका बन गया।
विजय की मां और पिता का किरदार निभाने वाले जानकी सबेश और विद्यार्थी ‘घिल्ली अम्मा’ और ‘घिल्ली अप्पा’ के नाम से मशहूर हो गए। 2008 में आई कुरुवी में इसी टीम ने फिर सहयोग किया। 2021 की मास्टर में कबड्डी दृश्य के साथ घिल्ली का संगीत इस्तेमाल हुआ और 2025 में आई मलयालम फिल्म भा भा बा ने इस फिल्म को श्रद्धांजलि दी।
री-रिलीज़: 20 साल बाद भी जादू बरकरार
2024 री-रिलीज़ (4K)
20वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 20 अप्रैल 2024 को ‘घिल्ली’ को 4K फॉर्मेट में दोबारा सिनेमाघरों में उतारा गया। यह री-रिलीज़ एक ऐतिहासिक घटना साबित हुई:
- भारत में किसी भी री-रिलीज़ का सर्वाधिक ओपनिंग डे रिकॉर्ड
- पहले दिन लगभग ₹8 करोड़ की वैश्विक कमाई
- 9 दिनों में भारत में $2.3 मिलियन (~₹19 करोड़) की कमाई
- अवतार री-रिलीज़, टाइटैनिक 3D और शोले 3D जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ा
- 8 दिनों में ₹25 करोड़+ की वैश्विक कमाई
- 2024 की 6वीं सबसे बड़ी तमिल फिल्म — राजनीकांत की लाल सलाम को भी पछाड़ा
2026 री-रिलीज़
20 फरवरी 2026 को ‘घिल्ली’ की तीसरी बार वापसी हुई:
- तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में 275 स्क्रीन, 250 स्थान
- पहले दिन लगभग 50,000 टिकटें बिकीं
- पहले दिन कुल ₹1 करोड़ की कमाई
- पहले सप्ताहांत में तमिलनाडु में ₹2 करोड़
- 4 दिनों में कुल ₹2.25 करोड़ की कमाई
विजय की विरासत और राजनीतिक पारी
‘घिल्ली’ को विजय के करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता है। हाल ही में विजय ने राजनीति में पूर्णकालिक प्रवेश की घोषणा करते हुए ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ नामक पार्टी का गठन किया है। उनकी आखिरी फिल्म, जिसे अनौपचारिक रूप से थलपति 69 कहा जा रहा है, की घोषणा की जा चुकी है।
दो दशक बाद भी ‘घिल्ली’ का जादू जस का तस है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक पीढ़ी की यादों का हिस्सा है — विजय के प्रशंसकों के प्यार, प्रकाश राज के अद्वितीय खलनायकी और त्रिशा की मासूम अदाकारी का वह संगम जो पर्दे पर बार-बार देखने का मन करता है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!
यह भी पढ़ें

अंकुर वारिकू की ब्लैक कॉफी थ्योरी कहती है: जब तक आप नहीं जानते कि आपको क्या चाहिए, तब तक ज़िंदगी भी नहीं जान सकती।
बदलाव एक सोच से शुरू होता है। 🖤☕
#AnkurWarikoo #BlackCoffeeTheory #MindsetShift #PersonalGrowth
Leave a Reply