सबसे पहले जानिए — यह हाईवे है क्या?
सोचिए, आप दिल्ली से देहरादून जा रहे हैं। पहले इसमें 6 घंटे लगते थे। ट्रैफिक जाम, टूटी सड़कें, धूल और थकान।
अब एक नया हाईवे बन रहा है जो यह सफर सिर्फ ढाई घंटे में पूरा कर देगा!
इसे कहते हैं दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे। यह एक बड़ी और चौड़ी सड़क है जो दिल्ली से सहारनपुर होते हुए सीधे देहरादून तक जाती है।
हाईवे की सरल जानकारी — एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| कुल लंबाई | 210 किलोमीटर |
| लेन (पट्टियाँ) | 6 (बाद में 8 हो सकती हैं) |
| स्पीड लिमिट | 100 किमी प्रति घंटा |
| कुल लागत | लगभग ₹12,000–13,000 करोड़ |
| शुरुआत कहाँ से | अक्षरधाम, दिल्ली |
| अंत कहाँ | देहरादून |
| बीच के शहर | बागपत, शामली, सहारनपुर |
| उद्घाटन | अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में संभावित |
यह हाईवे बना कैसे? — चार हिस्सों में समझिए
इस हाईवे को चार भागों में बनाया गया है। जैसे किसी बड़ी किताब के चार अध्याय होते हैं।

पहला हिस्सा (32 किमी): दिल्ली के अक्षरधाम से बागपत तक। यह पहले से बनी सड़क को और चौड़ा करके बनाया गया है।
दूसरा हिस्सा (118 किमी): बागपत से सहारनपुर तक। यह बिल्कुल नई सड़क है। खाली ज़मीन पर बनाई गई। इसे ही “ग्रीनफील्ड” कहते हैं।
तीसरा हिस्सा (40 किमी): सहारनपुर से गणेशपुर तक। यह उत्तराखंड की सीमा तक पहुँचाता है।
चौथा हिस्सा (20 किमी): गणेशपुर से देहरादून तक। यहाँ राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से एक ऊँचा पुल गुज़रता है ताकि जंगली जानवर नीचे से निकल सकें।
सहारनपुर में बिजली की तारें बनी रुकावट
यह हाईवे लगभग तैयार है। लेकिन एक छोटी-सी मुश्किल अभी भी बाकी है।
सहारनपुर जिले में हाईवे की कुल लंबाई 74 किलोमीटर है। इसमें से 41 किलोमीटर पर गाड़ियाँ पहले से चल रही हैं। बाकी 33 किलोमीटर पर काम जारी है।
परेशानी यह है कि कुछ जगहों पर बिजली की हाई-वोल्टेज तारें (power lines) हाईवे के ऊपर से गुज़रती हैं। इन तारों को हटाना ज़रूरी है, नहीं तो हाईवे पर गाड़ियाँ चलाना खतरनाक हो सकता है।
यह काम बिजली विभाग को करना है। इसमें थोड़ा समय लग रहा है, जिसकी वजह से उद्घाटन में देरी हो रही है।
इसके अलावा सड़क की स्ट्रीट लाइटिंग और पेड़-पौधे लगाने का काम भी कुछ हिस्सों में अभी चल रहा है।
उद्घाटन कब होगा?
NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में देहरादून आ सकते हैं और इस हाईवे का उद्घाटन कर सकते हैं।
उद्घाटन समारोह फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI), देहरादून में होने की योजना है।
हेलीपैड बनाने का काम भी जोर-शोर से चल रहा है। गणेशपुर टोल प्लाजा के पास तीन हेलीपैड पहले से तैयार हैं। अब तीन और बनाए जा रहे हैं — यानी कुल छह हेलीपैड!
हालाँकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से अभी तक कोई आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
इस हाईवे की खास बातें जो बच्चे भी समझें
जानवरों के लिए खास पुल: देहरादून के पास राजाजी नेशनल पार्क है। वहाँ हाथी, हिरण और बाघ रहते हैं। हाईवे को जानवरों के ऊपर से बनाया गया है — यानी सड़क ऊँची है और जानवर नीचे से निकलते हैं। यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है — 12 किलोमीटर लंबा!
सोलर पैनल: हाईवे पर सूरज की रोशनी से बिजली बनाने वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं।
बारिश का पानी भी काम आएगा: रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। यानी बारिश का पानी बर्बाद नहीं होगा।
बाढ़ से सुरक्षा: देहरादून के पास नदियों वाले इलाके में 24 खंभे हैं जो बाढ़ आने पर भी नहीं टूटेंगे। इनके चारों तरफ 1.5 से 2 फुट मोटा सीमेंट का कवच लगाया गया है।
सुरंग भी है: दात काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है।
यह हाईवे किन लोगों के लिए फायदेमंद है?
यह हाईवे बहुत लोगों की ज़िंदगी बेहतर करेगा —
- दिल्ली-NCR के लोग जो देहरादून घूमने या काम से जाते हैं
- नोएडा, गाज़ियाबाद, लोनी और बागपत के निवासी
- उत्तराखंड के व्यापारी जिनका सामान दिल्ली में बिकता है
- चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु (यह हाईवे हरिद्वार तक जोड़ता है)
- ट्रक और माल ढोने वाले — जिनका ईंधन और समय दोनों बचेगा
टोल कितना लगेगा?
अभी जो जानकारी मिली है उसके अनुसार —
- FASTag वार्षिक पास से यात्रा करने पर लगभग ₹60 में पूरा सफर हो सकता है
- बिना FASTag के ₹500 तक टोल लग सकता है
पहले कब-कब हुई थी देरी?
यह हाईवे 2024 के अंत तक बनना था। फिर अक्टूबर 2025, फिर दिसंबर 2025, फिर फरवरी 2026 और फिर मार्च 2026 — हर बार कोई न कोई कारण से देरी होती गई।
PMO का निर्देश था कि सभी चार फेज़ पूरे होने के बाद ही उद्घाटन हो। इसलिए जब तक एक हिस्सा भी अधूरा था, उद्घाटन नहीं हुआ।
अब NHAI का कहना है कि अप्रैल 2026 में यह हाईवे पूरी तरह खुल जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: दिल्ली से देहरादून कितने घंटे में पहुँचेंगे?
जवाब: सिर्फ ढाई घंटे में! अभी 6 घंटे लगते हैं।
सवाल: यह हाईवे कहाँ से शुरू होता है?
जवाब: दिल्ली के अक्षरधाम से।
सवाल: उद्घाटन कौन करेगा?
जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में।
सवाल: बिजली की तारें क्यों बनी रुकावट?
जवाब: सहारनपुर में कुछ जगह हाई-वोल्टेज बिजली लाइनें हाईवे के ऊपर हैं। इन्हें हटाना ज़रूरी है। इसका काम अभी चल रहा है।
सवाल: क्या जानवरों का ध्यान रखा गया है?
जवाब: हाँ! राजाजी नेशनल पार्क के पास 12 किमी ऊँचा पुल बना है ताकि हाथी और अन्य जानवर नीचे से आराम से निकल सकें।
सवाल: हाईवे की लागत क्या है?
जवाब: लगभग ₹12,000 से ₹13,000 करोड़ रुपये।
निष्कर्ष
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है — यह लाखों लोगों के सपनों का रास्ता है।
सहारनपुर में बिजली की तारों की समस्या एक छोटी-सी रुकावट है। जल्द ही यह दूर होगी और अप्रैल 2026 में प्रधानमंत्री मोदी इस हाईवे का उद्घाटन करेंगे।
उस दिन दिल्ली से देहरादून का सफर पहले से बहुत आसान, सस्ता और तेज़ हो जाएगा।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!
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