प्रकाशित समय : सुबह
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) की प्रक्रिया में मदद के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग (ECI) के बीच चल रहे “दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप” और “विश्वास की कमी” (Trust Deficit) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह कदम उठाया।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि उनके पास इस “असाधारण स्थिति” में “असाधारण आदेश” देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ:
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “आरोपों और प्रत्यारोपों का यह एक दुर्भाग्यपूर्ण परिदृश्य है, जो दो संवैधानिक संस्थाओं—राज्य सरकार और चुनाव आयोग—के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है। फिलहाल यह पूरी प्रक्रिया उन लोगों के दावों और आपत्तियों के स्तर पर अटक गई है जिनके नाम ‘विसंगति सूची’ (Discrepancy List) में शामिल हैं।”

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त सक्षम अधिकारी न उपलब्ध कराए जाने पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा, “आप सक्षम ग्रुप-ए अधिकारी प्रदान नहीं कर रहे हैं। अक्षम अधिकारी लोगों के भाग्य का फैसला कैसे कर सकते हैं? हमें उम्मीद थी कि राज्य सहयोग करेगा, लेकिन इस स्तर का संवाद निराशाजनक है।”
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
- न्यायिक अधिकारियों की तैनाती: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे जिला न्यायाधीश या अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) रैंक के कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को इस कार्य के लिए उपलब्ध कराएं। ये अधिकारी प्रत्येक जिले में दावों और आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
- कल होगी महत्वपूर्ण बैठक: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य चुनाव आयुक्त, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और अन्य शीर्ष अधिकारी कल कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठक कर इस योजना के विवरण तय करें।
- सुरक्षा और लॉजिस्टिक: जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे इन न्यायिक अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करें।
- मतदाता सूची का प्रकाशन: चुनाव आयोग को 28 फरवरी तक ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई है, जबकि शेष सूची बाद में पूरक (Supplementary) सूचियों के रूप में जारी की जा सकती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतदाता सूची की सफाई के अभियान (SIR) को लेकर उपजे विवाद से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि वह वास्तविक मतदाताओं को बाहर निकालने के लिए इस प्रक्रिया का “दुरुपयोग” कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया था कि असम जैसे राज्यों में ऐसी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार पर असहयोग और आवश्यक डेटा व अधिकारी उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णय “अदालत के आदेश” माने जाएंगे, ताकि प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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