रक्षा खरीद बोर्ड ने दी हरी झंडी: 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट विमान और S-400 मिसाइल सिस्टम को मंजूरी

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प्रकाशित समय : सुबह

भारत के रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board – DPB) ने 2 मार्च 2026 को एक अहम बैठक में भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय भारत की हवाई परिवहन क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


पुराने विमानों की जगह लेंगे नए एयरक्राफ्ट

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में सोवियत काल के An-32 और Il-76 विमान हैं, जो चार दशकों से अधिक समय से सेवा में हैं। इन विमानों का रखरखाव अब बेहद महंगा और जटिल हो गया है तथा स्पेयर पार्ट्स की कमी भी गंभीर समस्या बन चुकी है। नए 60 विमान इन्हीं पुराने बेड़े की जगह लेंगे।

भारतीय वायुसेना के लिए रक्षा खरीद बोर्ड द्वारा स्वीकृत 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम — चीन व पाकिस्तान सीमा पर तैनाती की तैयारी
रक्षा खरीद बोर्ड का बड़ा फैसला — 60 ट्रांसपोर्ट विमान और S-400 मिसाइल सिस्टम को मंजूरी | भारत की सीमाएं होंगी और मज़बूत

‘बाय एंड मेक’ नीति के तहत होगी खरीद

सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप इस सौदे में ‘Buy and Make’ रणनीति अपनाई जाएगी:

  • 12 विमान सीधे निर्माता से ‘फ्लाईअवे’ हालत में खरीदे जाएंगे
  • 48 विमान किसी घरेलू निजी साझेदार के साथ मिलकर भारत में ही निर्मित किए जाएंगे

इस पूरे सौदे की अनुमानित लागत लगभग ₹1,00,000 करोड़ (करीब 12 अरब डॉलर) है और इसमें 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य रखा गया है।


तीन बड़ी कंपनियां हैं दौड़ में

इस मेगा टेंडर के लिए तीन प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियां प्रतिस्पर्धा में हैं:

  • Embraer (ब्राजील) – C-390 विमान, जो स्वदेशी ‘जोरावर’ लाइट टैंक (25 टन) को ले जाने में सक्षम है
  • Lockheed Martin (अमेरिका) – C-130J, जिसका भारत में पहले से रखरखाव ढांचा मौजूद है
  • Airbus (यूरोप) – A-400M, हालांकि इसके अधिक लागत के कारण इसे बाहर होने की संभावना है

रक्षा सूत्रों के अनुसार अब मुख्य मुकाबला Embraer के C-390 और Lockheed Martin के C-130J के बीच है, जिनमें भारतीय साझेदार क्रमशः Mahindra और TASL हैं।


DAC और CCS की मंजूरी अभी बाकी

DPB की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव अब रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा। इन दोनों की स्वीकृति के बाद ही यह सौदा अंतिम रूप लेगा।


S-400 मिसाइल सिस्टम: चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनाती

रक्षा मोर्चे पर एक और बड़ी खबर यह है कि भारत पाँच और S-400 स्क्वाड्रन की खरीद की तैयारी में है। भारतीय वायुसेना में ‘सुदर्शन चक्र’ के नाम से जाने जाने वाले इस सिस्टम के पहले से तीन रेजिमेंट सेट चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात किए जा चुके हैं।

इसके अलावा 12 फरवरी 2026 को DAC ने Fast Track Procurement (FTP) के तहत 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलों की खरीद को Acceptance of Necessity (AoN) दे दी है। यह कदम 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद उपयोग हुई मिसाइलों की भरपाई के लिए जरूरी बताया जा रहा है।

बाकी दो रेजिमेंट सेट नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है, जो कि यूक्रेन युद्ध के कारण पहले हुई देरी के बाद तय हुई नई समयसीमा है।

वायुसेना की ताकत बढ़ाने पर जोर

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने इससे पहले स्पष्ट किया है कि भारत की मानवरहित प्रणालियाँ भविष्य की सुरक्षा संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसी क्रम में DPB ने DRDO के ‘घातक’ स्टेल्थ कॉम्बैट ड्रोन के लिए भी 60 UCAV की खरीद को मंजूरी दी है।

भारत की वायुसेना फिलहाल 42 स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले केवल 31 स्क्वाड्रन पर काम कर रही है। इन नए अनुमोदनों का उद्देश्य इसी कमी को पाटना है और चीन तथा पाकिस्तान की सीमाओं पर रणनीतिक बढ़त बनाए रखना है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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