प्रकाशित समय : सुबह
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक दर्जन से अधिक टैंकरों पर 1.5 करोड़ से ज़्यादा बैरल रूसी कच्चा तेल तैर रहा है, जो भारत के लिए मध्य-पूर्व की आपूर्ति संकट का त्वरित समाधान बन सकता है। यह तब संभव हुआ जब अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी।
अमेरिका ने दी 30 दिन की छूट
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार देर रात एक महीने की विशेष छूट (वेवर) की घोषणा की, जिसके तहत भारतीय रिफाइनरियाँ समुद्र में फंसा रूसी तेल खरीद सकती हैं। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे “वैश्विक बाजार में तेल प्रवाह बनाए रखने के लिए एक जानबूझकर अल्पकालिक उपाय” बताया।

यह छूट ऐसे समय में आई जब ईरान के साथ जारी संघर्ष के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है। भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40% इसी रास्ते से आता है।
कितना तेल और कहाँ है?
ब्लूमबर्ग के जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार:
- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में फैले टैंकरों पर 1.5 करोड़ बैरल से अधिक रूसी तेल मौजूद है, जो एक सप्ताह से भी कम समय में भारतीय बंदरगाहों तक पहुँच सकता है।
- सिंगापुर के निकट आठ और टैंकर लगभग 70 लाख बैरल रूसी Urals तेल लेकर खड़े हैं, जो भी एक सप्ताह में भारत पहुँच सकते हैं।
- भूमध्य सागर और स्वेज नहर से होकर और माल पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जो एक महीने के भीतर भारत पहुँच सकता है।
ऊर्जा बाजार खुफिया फर्म Kpler के अनुसार करीब 18 टैंकर अब भारतीय बंदरगाहों की ओर अपना गंतव्य बदल चुके हैं।
भारतीय रिफाइनरियाँ पहले से खरीद में जुटीं
भारतीय रिफाइनर पहले ही हरकत में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकारी कंपनियाँ Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और Mangalore Refinery ने व्यापारियों से प्रॉम्प्ट डिलीवरी के लिए बातचीत शुरू कर दी है।
हाल के दिनों में भारतीय रिफाइनरों ने 1 करोड़ से अधिक बैरल Urals तेल खरीदा है — और यह खरीद अमेरिकी वेवर की घोषणा से पहले भी हो रही थी।
दाम बढ़े, छूट हुई कम
जो रूसी तेल कुछ सप्ताह पहले ब्रेंट से $13 प्रति बैरल की भारी छूट पर मिल रहा था, अब वही तेल $4–5 प्रति बैरल प्रीमियम पर बिक रहा है। पिछले हफ्तों की तुलना में कीमतें $12 प्रति बैरल तक ऊँची हो गई हैं।
Kpler के वरिष्ठ विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, “रिफाइनर जल्द ही खरीद बढ़ा सकते हैं और निकट भविष्य में मात्रा फिर से प्रतिदिन 20 लाख बैरल से ऊपर जा सकती है। पहले जो भारी छूट मिलती थी, वह काफी कम हो सकती है — और यह प्रीमियम में भी बदल सकती है।”
पृष्ठभूमि: कैसे आई यह नौबत?
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार बन गया था। लेकिन नवंबर 2025 में अमेरिका ने रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों — Rosneft और Lukoil — पर प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद भारत ने अमेरिकी दबाव में रूसी तेल की खरीद घटा दी।
भारत में रूसी तेल का आयात दिसंबर 2025 में घटकर 12 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया — जो 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर था। जनवरी में यह और गिरकर 11 लाख बैरल रह गया।
अब मध्य-पूर्व संकट ने यह समीकरण पलट दिया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। देश की रिफाइनरियाँ प्रतिदिन करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रक्रिया करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश के पास मौजूदा मांग को केवल 25 दिन तक पूरा करने के लिए तेल भंडार है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने का असर सीधे महंगाई और राजकोषीय घाटे पर पड़ सकता है। रूसी दूतावास ने संकेत दिया है कि मॉस्को भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है, और तेल के साथ-साथ LNG की आपूर्ति में भी मदद करने को तैयार है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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