भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस: यात्री संख्या और कमाई में जबरदस्त प्रदर्शन, जानें ताजा आंकड़े

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प्रकाशित समय : सुबह

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे यात्रियों की जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए लगातार अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेशनल ट्रांसपोर्टर ने साल 2019 में देश की पहली ‘प्राइवेट’ ट्रेन की शुरुआत की थी।

वर्तमान में भारतीय रेल नेटवर्क पर ऐसी दो ट्रेनें दौड़ रही हैं, जिनका संचालन और रखरखाव पूरी तरह से इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा किया जाता है।

दिल्ली-लखनऊ और मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली भगवा रंग की आधुनिक तेजस एक्सप्रेस ट्रेन का बाहरी दृश्य और कोच।
🚄 तेजस एक्सप्रेस का कमाल! कमाई और रफ्तार में भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन ने बनाया नया रिकॉर्ड। मुंबई-अहमदाबाद रूट पर 100% से भी ज्यादा रही ऑक्यूपेंसी। क्या आपने किया है इसमें सफर? जानिए पूरी रिपोर्ट।
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तेजस एक्सप्रेस के रूट और विस्तार

देश की पहली प्राइवेट ट्रेन, तेजस एक्सप्रेस, दिल्ली और लखनऊ के बीच सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर पर संचालित होती है। इस रूट पर मिली बड़ी सफलता के बाद, साल 2020 में दूसरी प्रीमियम तेजस ट्रेन शुरू की गई, जो अहमदाबाद और मुंबई को आपस में जोड़ती है।

कमाई और ऑक्यूपेंसी (यात्री संख्या) के ताजा आंकड़े

ताजा आंकड़ों के अनुसार, तेजस एक्सप्रेस ने कमाई के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

  • राजस्व (Revenue): वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान, तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों ने लगभग 50 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है।
  • यात्री संख्या (Occupancy): इस अवधि के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या भी काफी उत्साहजनक रही:
    • दिल्ली-लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस: इसमें यात्रियों की औसत संख्या (Occupancy) 69 प्रतिशत रही।
    • अहमदाबाद-मुंबई-अहमदाबाद तेजस एक्सप्रेस: इस रूट पर ट्रेन ने कमाल का प्रदर्शन किया और इसकी ऑक्यूपेंसी 109 प्रतिशत दर्ज की गई (यानी वेटिंग लिस्ट के यात्रियों के साथ ट्रेन क्षमता से अधिक भरकर चली)।

आधुनिक सुविधाएं और रफ्तार

तेजस एक्सप्रेस एक ‘सेमी हाई-स्पीड’ ट्रेन है, जिसे यात्रियों के आराम और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

  • निर्माण: इन ट्रेनों के कोच कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में तैयार किए गए हैं।
  • रफ्तार: रेल मंत्रालय के अनुसार, इन कोचों को 200 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि, रेल पटरियों की वर्तमान सीमाओं के कारण अभी इन्हें 160 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चलाया जा रहा है।
  • तकनीक: सुरक्षा और रफ्तार के लिए इनमें स्टील ब्रेक डिस्क, सिंटर्ड पैड्स और इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक असिस्ट ब्रेक सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

IRCTC द्वारा संचालित इन ट्रेनों ने रेलवे के निजीकरण और प्रीमियम सेवाओं के मॉडल को एक नई दिशा दी है, जिससे न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है बल्कि यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव भी मिल रहा है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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