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नई दिल्ली, एजुकेशन डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से 20 फरवरी 2026 को आयोजित की गई कक्षा 12वीं की भौतिक विज्ञान (Physics) की परीक्षा विवादों में घिर गई है। परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्रों और शिक्षकों ने प्रश्नपत्रों के असंतुलित होने की शिकायत की है। इस मामले में अब एक शिक्षक ने छात्रों के समर्थन में जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
अलग-अलग सेटों में कठिनाई का स्तर समान नहीं
छात्रों और शिक्षकों द्वारा किए गए पेपर एनालिसिस के अनुसार, इस बार फिजिक्स के विभिन्न प्रश्नपत्रों के सेट में समानता नहीं थी। आरोप है कि कुछ सेट बहुत कठिन थे, जबकि कुछ काफी सरल थे। इस असमानता के कारण छात्रों के बीच भारी असंतोष है।

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शिक्षक प्रशांत किराड ने दायर की PIL
छात्रों की आवाज उठाते हुए शिक्षक प्रशांत किराड ने जनहित याचिका (PIL) दायर की है। उनका तर्क है कि पेपर के स्तर में भिन्नता होने के कारण छात्रों का भविष्य उनकी मेहनत के बजाय ‘किस्मत’ पर निर्भर हो गया है। किराड के अनुसार, “यह स्थिति छात्रों के बीच असमानता पैदा करती है और इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।”
ग्रेस मार्क्स या मूल्यांकन में ढिलाई की मांग
PIL में मांग की गई है कि सीबीएसई इस स्थिति का संज्ञान ले और प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए:
- छात्रों को कठिनाई स्तर को देखते हुए ग्रेस मार्क्स (अतिरिक्त अंक) दिए जाएं।
- कॉपियों की जांच (मूल्यांकन) के समय ढिलाई बरती जाए ताकि छात्रों का नुकसान न हो।
इस बार डिजिटल मोड में होगा मूल्यांकन
गौरतलब है कि इस साल 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक संचालित की जा रही हैं। इस बार सीबीएसई एक बड़ा बदलाव करते हुए लगभग 1 करोड़ कॉपियों (32 करोड़ पन्ने) का मूल्यांकन डिजिटल मोड (ऑनस्क्रीन) पर करने जा रहा है।
कैसे होगी जांच?
- सभी कॉपियों को स्कैन करके शिक्षकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
- शिक्षक अपने स्कूल की कंप्यूटर लैब में बैठकर ऑनस्क्रीन कॉपियों की जांच करेंगे।
- पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कॉपी पर छात्र का नाम या रोल नंबर दिखाई नहीं देगा।
सीबीएसई के अनुसार, इस प्रक्रिया से ट्रांसपोर्ट का खर्च बचेगा और मूल्यांकन में तेजी आएगी। हालांकि, अब देखना यह होगा कि बोर्ड फिजिक्स के पेपर को लेकर उठ रही मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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