सिंधु जल समझौते पर रोक के बाद भारत का बड़ा कदम: चिनाब नदी पर सलाल बांध की सफाई (Desilting) का काम शुरू

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प्रकाशित समय : सुबह

नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ ‘सिंधु जल समझौते’ (Indus Water Treaty) को स्थगित करने के बाद, भारत ने जम्मू-कश्मीर में अपनी जल विद्युत संपत्तियों की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। करीब पांच दशकों के बाद, चिनाब नदी पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सलाल बांध (Salal Dam) में जमी गाद (सिल्ट) को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर ‘डीसिल्टिंग’ ऑपरेशन शुरू किया गया है।

50 साल बाद टूटी ‘गाद’ की बेड़ियाँ

पिछले कई दशकों से सिंधु जल समझौते की पाबंदियों के कारण भारत इन बांधों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई नहीं कर पा रहा था। इसके परिणामस्वरूप, जलाशयों में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई थी, जिससे न केवल पानी की भंडारण क्षमता कम हुई, बल्कि बिजली पैदा करने वाले टर्बाइनों को भी नुकसान पहुँच रहा था।

Aerial view of Salal Dam on the Chenab River featuring heavy machinery performing mechanical desilting and dredging operations to remove accumulated sediment.
पांच दशकों में पहली बार, भारत ने चिनाब नदी पर सलाल डैम से बड़े पैमाने पर गाद निकालने का काम शुरू किया है। इंडस वॉटर ट्रीटी पर स्ट्रेटेजिक रोक के बाद, इस कदम का मकसद खोई हुई पावर कैपेसिटी को वापस लाना और J&K के हाइड्रो इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाना है। एनर्जी सिक्योरिटी की तरफ एक बड़ा कदम!
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलाल पावर स्टेशन के जलाशय की मूल क्षमता 284 मिलियन क्यूबिक मीटर थी, जो गाद जमा होने के कारण मई 2025 तक घटकर मात्र 9 मिलियन क्यूबिक मीटर रह गई थी। समझौते की शर्तों के कारण, गाद निकालने के लिए बनाए गए ‘अंडर-स्लूस’ और ‘सिल्ट एक्सक्लूडर गेट्स’ को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।

NHPC का बड़ा अभियान

समझौते पर रोक लगने के बाद, भारत सरकार ने जल विद्युत ऑपरेटरों को जलाशयों की क्षमता बहाल करने का निर्देश दिया है। सरकारी कंपनी NHPC लिमिटेड ने सलाल बांध पर मैकेनिकल ड्रेजिंग (Mechanical Dredging) का काम तेज कर दिया है।

  • अगस्त 2025 में इसके लिए एनओसी (NOC) जारी की गई थी और नवंबर से काम शुरू हुआ।
  • अब तक 1.77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है।
  • मुंबई और कोलकाता की कंपनियों को ड्रेजिंग के ठेके दिए गए हैं।

रणनीतिक और आर्थिक लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से बिजली उत्पादन की दक्षता (Efficiency) बढ़ेगी और रखरखाव की लागत में कमी आएगी। इसके अलावा, निकाली गई गाद (धुली हुई रेत) उच्च गुणवत्ता की है, जिसका उपयोग NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और भारतीय रेलवे द्वारा सड़कों और पुलों के निर्माण में किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

भारत ने पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की प्रमुख परिचालन धाराओं को निलंबित कर दिया था। इस निलंबन के बाद भारत अब अपनी पश्चिमी नदियों (चिनाब, झेलम और सिंधु) के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है।

अधिकारियों का कहना है कि सलाल के बाद चिनाब बेसिन के अन्य पावर स्टेशनों जैसे कि बागलीहार में भी इसी तरह के सफाई अभियान चलाए जाएंगे ताकि दशकों से ‘दम तोड़ रहे’ इन बांधों को नया जीवन दिया जा सके।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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