प्रकाशित समय : सुबह
किर्लोस्कर ऑयल इंजन लिमिटेड (KOEL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राहुल सहाय ने विश्वास जताया है कि कंपनी अप्रैल 2028 की समय सीमा तक भारतीय नौसेना को भारत का पहला स्थानीय रूप से निर्मित समुद्री इंजन (Marine Engine) सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह इंजन एक ‘फोर-स्ट्रोक, 6 मेगावाट (MW) V12’ इंजन होगा।
समय पर डिलीवरी का भरोसा
रक्षा क्षेत्र के ऑर्डर मिलने के बाद कुछ शिपयार्डों में इस बात को लेकर चिंता थी कि क्या इंजन समय पर उपलब्ध हो पाएगा, क्योंकि अभी इंजन का प्रोटोटाइप (नमूना) पूरी तरह तैयार नहीं है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए राहुल सहाय ने कहा, “हमारी समयसीमा के अनुसार, हम बिल्कुल सही रास्ते पर हैं। रक्षा मंत्रालय में सचिव स्तर पर इसकी समीक्षा की जाती है, इसलिए इसमें देरी की गुंजाइश बहुत कम है।”

उन्होंने आगे कहा कि नौसेना के अधिकांश ऑर्डर्स का निष्पादन 2028 के बाद होना है, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि भारतीय नौसेना अपने प्रत्येक जहाज के लिए स्वदेशी इंजन ही चाहेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- स्वदेशी तकनीक: इस प्रोटोटाइप डीजल इंजन में 50 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी होगी।
- बजट: इसे ₹270 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिसमें से 70 प्रतिशत योगदान केंद्र सरकार का है।
- रेंज: इस परियोजना के तहत 3 मेगावाट से 10 मेगावाट तक के इंजन डिजाइन विकसित किए जा रहे हैं।
- विनिर्माण इकाई: इन बड़े इंजनों के लिए नासिक में एक समर्पित निर्माण सुविधा बनाई गई है, जो अब लगभग चालू होने की स्थिति में है।
‘बौद्धिक संपदा (IP) भारत की होगी’
राहुल सहाय ने स्पष्ट किया कि इंजन का डिजाइन पूरी तरह से किर्लोस्कर का अपना है। हालांकि रिकॉर्डो (Ricardo) जैसी वैश्विक कंपनियां कुछ घटकों के विकास में सहयोग कर रही हैं, लेकिन इसकी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) भारत में ही रहेगी। उन्होंने कहा, “एक भारतीय कंपनी होने के नाते हमारे लिए यह गर्व की बात है कि आईपी भारत के पास है। राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के मामलों में हमारा मानना है कि आईपी देश के भीतर ही होनी चाहिए।”
निर्यात की संभावनाएं
कंपनी का मानना है कि यह 6 मेगावाट का इंजन अपने वर्ग में विश्व स्तर पर सबसे उन्नत इंजनों में से एक होगा। इससे न केवल भारतीय नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि मित्र देशों को निर्यात करने के भी बड़े अवसर खुलेंगे।
भविष्य की योजनाएं
जब उनसे पूछा गया कि क्या कंपनी ‘टू-स्ट्रोक’ इंजन बनाने पर भी विचार करेगी, तो उन्होंने कहा कि यदि नौसेना या देश की आवश्यकता होगी, तो वे इस पर काम करने के लिए तैयार हैं। उनका लक्ष्य न केवल स्वदेशी सामग्री को बढ़ावा देना है, बल्कि भारत में ही एक मजबूत सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) विकसित करना भी है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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