फरीदाबाद के तीन गांवों में लगेंगे अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र

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प्रकाशित समय : सुबह

हरियाणा सरकार और नगर निगम फरीदाबाद (MCF) ने शहर के तीन गांवों में अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plants – STP) स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जल प्रदूषण को रोकना और यमुना नदी को स्वच्छ रखने की दिशा में ठोस प्रयास करना है।

किन गांवों को मिलेगा लाभ

सूत्रों के अनुसार, प्रतापगढ़, मिर्जापुर और मांझावली गांवों को इस परियोजना के तहत चुना गया है। इन गांवों में वर्षों से अनुपचारित सीवेज का पानी खुले नालों और खेतों में बह रहा था, जिससे भूजल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।

फरीदाबाद के ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित होने वाले अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का प्रतीकात्मक चित्र, हरियाणा सरकार की जल स्वच्छता पहल।
फरीदाबाद के तीन गांवों में बनेंगे अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र — स्वच्छ जल की दिशा में बड़ा कदम।

क्या है योजना

नए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों की स्थापना से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदे पानी को उपचारित कर उसे कृषि कार्यों, बागवानी और अन्य गैर-पेय उपयोगों के लिए पुनः इस्तेमाल किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इन संयंत्रों के चालू होने के बाद इन गांवों का अनुपचारित पानी सीधे नालों या नदियों में नहीं जाएगा।

नगर निगम फरीदाबाद के मुख्य अभियंता ने बताया कि शहर की सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। फरीदाबाद में पहले से ही प्रतापगढ़ और मिर्जापुर में बड़े एसटीपी अपग्रेड का काम चल रहा है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 180 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है। इन नए संयंत्रों की स्थापना उसी विस्तृत जल प्रबंधन योजना का हिस्सा है।

क्यों जरूरी है यह कदम

फरीदाबाद तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र है और इसकी आबादी हर साल बढ़ रही है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के अनुसार, शहर के 80 से 90 प्रतिशत तक अनुपचारित अपशिष्ट जल नालों, नहरों और यमुना नदी में जा रहा था। इससे भूजल की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि गांवों में सीवेज ट्रीटमेंट की सुविधा न होना एक बड़ी कमी रही है। शहरी एसटीपी बड़े शहरों में केंद्रित रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाके वर्षों से इस बुनियादी सुविधा से वंचित थे।

ग्रामीणों में उत्साह

इन गांवों के निवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदे पानी की निकासी न होने के कारण बरसात में पूरे इलाके में दुर्गंध और बीमारियाँ फैलती थीं। संयंत्र के लगने से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि खेतों में उपचारित जल के उपयोग से किसानों को भी फायदा मिलेगा।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और निर्माण कार्य अगले कुछ महीनों में आरंभ होने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में जल स्वच्छता और पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी जा रही है, जो केंद्र सरकार के ‘अमृत 2.0’ मिशन और ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के अनुरूप है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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