प्रकाशित समय : सुबह
मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष और लगातार होते ड्रोन व मिसाइल हमलों ने दुनियाभर के देशों को अपनी हवाई रक्षा पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है। इस पृष्ठभूमि में भारत ने भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली को तेज़ी से मज़बूत करने के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायु सेना (IAF) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें रूस से पांच अतिरिक्त S-400 ‘सुदर्शन’ स्क्वाड्रन खरीदने की मांग की गई थी। इसके साथ ही फ्रांस से SCALP क्रूज़ मिसाइल और मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल तथा इजरायल से बराक-8 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों की खरीद की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
S-400 सुदर्शन: ऑपरेशन सिंदूर से मिली नई ताकत
भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 5.43 अरब डॉलर की डील के तहत S-400 की पांच स्क्वाड्रन खरीदी थीं। अब तक तीन स्क्वाड्रन डिलीवर हो चुकी हैं और शेष दो के 2026-2027 तक आने की उम्मीद है। अब पांच और स्क्वाड्रन खरीदकर भारत अपनी लंबी दूरी की हवाई रक्षा को लगभग दोगुना करना चाहता है। इन्हें पूर्वी और पश्चिमी — दोनों मोर्चों पर तैनात किया जाएगा।

S-400 की ताकत मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जगज़ाहिर हो गई। इस ऑपरेशन में इस सिस्टम ने 300 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर पाकिस्तान के पांच-छह लड़ाकू विमान और एक उच्च-मूल्य वाले जासूसी विमान को मार गिराया। यह अब तक का सबसे लंबी दूरी का एयर किल माना जा रहा है। भारतीय वायु सेना ने इस सिस्टम को ‘गेम-चेंजर’ की संज्ञा दी है।
दूसरी ओर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन निर्मित HQ-9 सिस्टम की अतिरिक्त स्क्वाड्रन तैनात की थीं, लेकिन वे भारतीय विमानों को रोकने में पूरी तरह विफल रहीं। यही नहीं, ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष में भी HQ-9B सिस्टम उन्नत हथियारों को रोकने में नाकाम साबित हुआ है। इस तुलनात्मक विफलता ने भारत के S-400 पर भरोसे को और पुख्ता किया है।
फ्रांस से SCALP क्रूज़ मिसाइल की बड़ी डील
भारत फ्रांस से बड़ी मात्रा में SCALP लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। यह डील लगभग 30 करोड़ यूरो की बताई जा रही है और इसमें भारतीय वायु सेना व नौसेना दोनों के लिए मिसाइलें शामिल हैं।
SCALP की मारक क्षमता ऑपरेशन सिंदूर में स्पष्ट देखने को मिली जब राफेल लड़ाकू विमानों ने इस मिसाइल और ब्रह्मोस के ज़रिए पाकिस्तान के मुरिदके और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को सटीकता के साथ नष्ट किया। यह डील भारत की ‘स्टैंड-ऑफ अटैक’ क्षमता — यानी दुश्मन की सीमा में घुसे बिना दूर से वार करने की ताकत — को काफी बढ़ाएगी।
मेटियोर मिसाइल और राफेल बेड़े की मज़बूती
भारतीय वायु सेना अपने राफेल बेड़े के लिए बड़ी संख्या में मेटियोर ‘बियॉन्ड विज़ुअल रेंज’ (BVR) मिसाइलें ऑर्डर करने की प्रक्रिया में है। यह मिसाइल 150 किलोमीटर से अधिक दूरी पर दुश्मन के विमान को मार सकती है और इसे अगले पीढ़ी की हवाई लड़ाई में सबसे खतरनाक मिसाइलों में गिना जाता है।
यह मिसाइल नौसेना के 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स में भी लगाई जाएगी, जो अगले 3-4 वर्षों में भारतीय नौसेना में शामिल होंगे। DAC ने हाल ही में फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट (FTP) मोड के तहत 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें खरीदने की भी मंजूरी दी है।
बहुस्तरीय वायु रक्षा: स्वदेशी और आयातित का मेल
भारत की रणनीति केवल विदेशी खरीद तक सीमित नहीं है। एक बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर) एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिसमें शामिल हैं:
- इजरायल से बराक-8 — मध्यम दूरी की एयर डिफेंस के लिए
- रूस से पैंटसिर सिस्टम — ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए, UAE में इसने ईरानी शाहेद ड्रोनों को मार गिराने में कामयाबी दिखाई है
- स्वदेशी अकाश और QR-SAM — छोटी और मध्यम दूरी की वायु रक्षा
- DRDO का प्रोजेक्ट कुशा — एक स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली जो भविष्य में विदेशी निर्भरता घटाएगी
भारत S-500 ‘प्रोमेटे’ सिस्टम की संभावना भी तलाश रहा है जो हाइपरसोनिक मिसाइलों और स्टेल्थ विमानों को रोकने में सक्षम है।
ईरान संघर्ष से सबक और भारत की दीर्घकालिक दृष्टि
ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में सस्ते ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलें महंगी वायु रक्षा प्रणालियों के भंडार को जल्दी खाली कर सकती हैं। कई देशों के इंटरसेप्टर स्टॉक्स समाप्त हो गए जबकि हमले जारी रहे।
भारत इस सबक को गंभीरता से ले रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर खतरे तथा दक्षिण एशिया में लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते प्रसार को देखते हुए एक मज़बूत बहुस्तरीय वायु रक्षा अनिवार्य है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि S-400 नेटवर्क के पूरी तरह ऑपरेशनल होने पर भारत का संयुक्त IADS लगभग 90 प्रतिशत हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम हो जाएगा। यह कदम चीन और पाकिस्तान — दोनों मोर्चों पर भारत की रणनीतिक स्थिति को और अधिक मज़बूत बनाएगा।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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