IRIS डेना डूबने से पहले भारत ने दिया था दूसरे ईरानी जहाज IRIS लवन को कोच्चि में आश्रय, 183 नाविक अभी भी ठहरे

Posted by

प्रकाशित समय : सुबह

हिंद महासागर में भड़के तनाव के बीच एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है। जिस दिन अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाया, ठीक उसी दिन — 4 मार्च 2026 को — एक अन्य ईरानी नौसैनिक जहाज IRIS लवन भारत के कोच्चि बंदरगाह में चुपचाप लंगर डाल चुका था। यह जहाज 28 फरवरी को ईरान के तकनीकी खराबी के अनुरोध पर 1 मार्च को भारत की अनुमति मिलने के बाद कोच्चि पहुंचा था।


क्या है पूरा मामला?

सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि ईरान ने 28 फरवरी 2026 को भारत सरकार से अनुरोध किया था कि उसके जहाज IRIS लवन को कोच्चि में आपातकालीन डॉकिंग की इजाजत दी जाए। ईरान ने इस अनुरोध को “अर्जेंट” बताते हुए कहा था कि जहाज में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई है। भारत ने 1 मार्च को इस अनुरोध को मंजूरी दे दी और IRIS लवन 4 मार्च को कोच्चि नौसैनिक अड्डे पर डॉक हो गया।

अमेरिकी टॉरपीडो हमले में डूबा ईरानी युद्धपोत IRIS डेना, हिंद महासागर में बढ़ता संकट
IRIS डेना डूबने से पहले भारत ने ईरानी जहाज IRIS लवन को कोच्चि में दी थी इमरजेंसी डॉकिंग, 183 नाविक अभी भी भारत में।

जहाज के 183 क्रू मेंबर्स को फिलहाल कोच्चि की नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है और उनके जहाज की तकनीकी जांच जारी है।


IRIS लवन कौन सा जहाज है?

IRIS लवन ईरान का एक एम्फिबियस वॉरफेयर लैंडिंग शिप है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह जहाज पिछले महीने भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) में हिस्सा लेने के लिए इस क्षेत्र में आया हुआ था। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि IRIS लवन ने IRIS डेना की तरह विशाखापट्टनम में आयोजित मिलान (MILAN 2026) नौसैनिक अभ्यास में भाग नहीं लिया था।


IRIS डेना का क्या हुआ?

IRIS डेना ईरान का एक मौज-क्लास फ्रिगेट था जो भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित MILAN 2026 और IFR अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। यह अभ्यास 15 से 25 फरवरी 2026 के बीच विशाखापट्टनम में 74 देशों और 18 विदेशी युद्धपोतों की भागीदारी के साथ आयोजित किया गया था।

4 मार्च की तड़के, IRIS डेना ने श्रीलंका के गाले बंदरगाह के दक्षिण में लगभग 40 नॉटिकल मील दूर अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक विस्फोट की सूचना देते हुए डिस्ट्रेस कॉल जारी की। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बाद में पुष्टि की कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने मार्क-48 टॉरपीडो से इस जहाज को निशाना बनाया। जब तक श्रीलंकाई नौसेना का बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचा, जहाज समुद्र में डूब चुका था।

श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक 87 शव बरामद किए हैं और 32 नाविकों को जीवित बचाया है। 100 से अधिक नाविक अभी भी लापता हैं।


भारत की भूमिका पर उठे सवाल

IRIS डेना का डूबना भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टिकोण से असहज करने वाला साबित हुआ है। जहाज भारत के मिलान अभ्यास से लौटते समय डुबोया गया, जिसे लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और निहत्था था। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।

भारत की प्रतिक्रिया घटना के 24 घंटे से अधिक समय बाद आई। भारतीय नौसेना ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें अमेरिकी सबमरीन हमले का कोई उल्लेख नहीं था। विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर कड़ी आलोचना की।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद इसी अभ्यास का उद्घाटन किया था जिसमें IRIS डेना शामिल था। पूर्व नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश ने सरकार से अपनी “गहरी चिंता और नाराजगी” औपचारिक रूप से व्यक्त करने की मांग की।

सरकारी सूत्रों ने भारत की किसी भी खुफिया जानकारी साझा करने की बात से इनकार किया। सूत्रों का कहना है कि जहाज के 25 फरवरी को भारतीय जलक्षेत्र से बाहर निकलने के बाद भारत की कोई जिम्मेदारी नहीं रह जाती।

क्षेत्रीय तनाव और व्यापक संदर्भ

यह घटना तब हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विरुद्ध “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की हत्या भी शामिल है। अमेरिका ने अब तक 20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज डुबोए होने का दावा किया है।

श्रीलंका के पास एक और ईरानी जहाज IRIS बुशहर के मौजूद होने की भी खबर है जिसे श्रीलंकाई नौसेना ने त्रिंकोमाली बंदरगाह में सुरक्षित किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने श्रीलंका से कहा है कि वह IRIS डेना के बचे हुए नाविकों को ईरान वापस न भेजे।

इस पूरे घटनाक्रम ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और तटस्थता के नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ ईरान का एक जहाज भारत के बंदरगाह में आश्रय लिए हुए है, तो दूसरी तरफ उसी देश का एक और जहाज अमेरिकी हमले में समुद्र की गहराइयों में समा चुका है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!

यह भी पढ़ें  

पीएम मोदी ने किया दिल्ली के पहले ‘रिंग मेट्रो’ का उद्घाटन — उत्तर-पूर्वी दिल्ली को मिली नई सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली मेट्रो के नए पिंक लाइन और मैजेंटा लाइन कॉरिडोर का उद्घाटन करते हुए, पृष्ठभूमि में डबल-डेकर वायडक्ट और उत्तर-पूर्वी दिल्ली का मेट्रो स्टेशन दृश्य।
पीएम मोदी ने दिल्ली को दी ऐतिहासिक सौगात — देश का पहला रिंग मेट्रो नेटवर्क लॉन्च! उत्तर-पूर्वी दिल्ली अब मेट्रो से सीधी जुड़ी। डबल-डेकर वायडक्ट, यमुना पर 5वाँ पुल और ₹18,300 करोड़ की परियोजना — दिल्ली का सफर बदल गया। 🚇 #DelhiMetro #PMModiInaugurates #RingMetro

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *