द्रुज्बा पाइपलाइन: दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन — जानिए क्या है इसका इतिहास, रास्ता और आज का विवाद

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द्रुज्बा पाइपलाइन क्या है?

दुनिया में तेल पहुंचाने के लिए कई रास्ते हैं — समुद्री जहाज, ट्रक और पाइपलाइन। लेकिन जब बात आती है सबसे बड़े और सबसे लंबे रास्ते की, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है — द्रुज्बा पाइपलाइन।

यह पाइपलाइन 4,000 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है और कई देशों की जमीन के नीचे से गुजरती है। यह रूस से शुरू होकर यूरोप के अनेक देशों तक पहुंचती है। हर दिन इसमें से लाखों बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) बहता है।

द्रुज्बा पाइपलाइन: दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन — जानिए क्या है इसका इतिहास, रास्ता और आज का विवाद

“द्रुज्बा” का मतलब क्या है?

द्रुज्बा (Druzhba) एक रूसी शब्द है। इसका हिंदी में मतलब होता है — “दोस्ती”।

यह नाम इसलिए रखा गया था क्योंकि जब यह पाइपलाइन बनाई गई थी, तब रूस (तब सोवियत संघ) और पूर्वी यूरोप के देश मिलकर काम करते थे। इस पाइपलाइन का मकसद था — दोस्ती और सहयोग से एक-दूसरे को ऊर्जा देना।


कब बनी यह पाइपलाइन?

इस पाइपलाइन की नींव 1958 में रखी गई थी। उस समय सोवियत संघ (Russia) ने पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, पूर्वी जर्मनी और हंगरी को तेल देने के लिए एक बड़े नेटवर्क की योजना बनाई।

  • 1960 में निर्माण शुरू हुआ।
  • 1962 में चेकोस्लोवाकिया को पहला तेल मिला।
  • 1964 में पूरी पाइपलाइन चालू हो गई।

यानी यह पाइपलाइन पिछले 60 से भी ज्यादा सालों से लगातार काम कर रही है।


पाइपलाइन का रास्ता कहां-कहां से है?

यह पाइपलाइन रूस के अल्मेत्येव्स्क (Tatarstan) शहर से शुरू होती है, जहां साइबेरिया और उरल क्षेत्र का तेल इकट्ठा होता है।

वहां से यह बेलारूस के मोज़र (Mozyr) शहर पहुंचती है और दो हिस्सों में बंट जाती है:

उत्तरी शाखा (Northern Branch)

  • बेलारूस → पोलैंडजर्मनी (Schwedt)

दक्षिणी शाखा (Southern Branch)

  • यूक्रेन → हंगरीस्लोवाकियाचेक गणराज्य

इस पाइपलाइन से छोटी-छोटी और पाइपलाइनें भी निकलती हैं जो पूर्वी यूरोप के बाकी हिस्सों तक तेल पहुंचाती हैं।


यूरोप के लिए यह इतनी जरूरी क्यों है?

यूरोप के कई देश अपनी फैक्ट्रियां, बिजली घर और पेट्रोल पंप चलाने के लिए इस पाइपलाइन पर निर्भर हैं। हंगरी तो अपनी 86% तेल जरूरत इसी पाइपलाइन से पूरी करता है।

इस पाइपलाइन से तेल पहुंचाना:

  • सस्ता पड़ता है।
  • तेज होता है।
  • और लगातार होता है — बिना किसी जहाज के इंतजार के।

2026 में क्या हो रहा है इस पाइपलाइन के साथ?

अभी यह पाइपलाइन दुनिया भर की खबरों में है। यहाँ जानिए पूरा मामला:

जनवरी 2026 — पाइपलाइन बंद हो गई

27 जनवरी 2026 को रूस ने यूक्रेन के ब्रोडी ऑयल हब पर ड्रोन हमला किया। इससे दक्षिणी शाखा की पाइपलाइन बुरी तरह टूट गई और हंगरी और स्लोवाकिया को तेल मिलना बंद हो गया।

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जलती हुई पाइपलाइन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और कहा कि यह रूस का हमला है। लेकिन हंगरी ने इस बात को नहीं माना और आरोप लगाया कि यूक्रेन खुद जानबूझकर तेल रोक रहा है।

फरवरी 2026 — यूरोप में विवाद बढ़ा

  • हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने कहा कि जब तक पाइपलाइन नहीं खुलती, वे यूक्रेन को 9,000 करोड़ यूरो का कर्ज नहीं देने देंगे।
  • स्लोवाकिया ने भी यूरोपीय संघ में यूक्रेन की सदस्यता रोकने की धमकी दी।
  • स्लोवाकिया की एकमात्र रिफाइनरी (Slovnaft) केवल रूसी तेल पर चलती है, इसलिए उसके लिए यह संकट और भी गंभीर है।

मार्च 2026 — यूरोपीय संघ ने की कोशिश

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की प्रमुख ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि EU पाइपलाइन की मरम्मत के लिए पैसा और तकनीकी मदद देने को तैयार है।

यूक्रेन ने EU के विशेषज्ञों को पाइपलाइन जांचने की अनुमति दी, लेकिन बाद में उन्हें रोक दिया गया। EU के राजनयिकों ने इसे “समझ से बाहर” और “गलत फैसला” बताया।

अप्रैल 2026 — अभी भी हल नहीं निकला

अभी तक इस मामले का कोई ठोस हल नहीं निकला है। हंगरी और स्लोवाकिया अब क्रोएशिया की एड्रिया पाइपलाइन के जरिए दूसरे देशों से तेल मंगाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्रोएशिया पर ज्यादा शुल्क लेने के आरोप भी लग रहे हैं।


क्या है एड्रिया पाइपलाइन?

एड्रिया पाइपलाइन क्रोएशिया के समुद्री तट से शुरू होती है और हंगरी तक जाती है। इसके जरिए तेल के जहाज से आए तेल को अंदरूनी देशों तक भेजा जा सकता है।

हंगरी का कहना है कि यह रास्ता महंगा है और पर्याप्त नहीं है। लेकिन क्रोएशिया कहता है कि उनकी पाइपलाइन पूरी तरह तैयार है और वे तुरंत तेल दे सकते हैं।


जर्मनी ने क्या किया?

जर्मनी पहले इस पाइपलाइन का बड़ा उपयोगकर्ता था। लेकिन 2023 में जर्मनी ने रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया। अब वह कजाकिस्तान से इसी उत्तरी पाइपलाइन के जरिए 12 लाख टन तेल हर साल मंगाता है।


यह सब हमें क्या सिखाता है?

द्रुज्बा पाइपलाइन सिर्फ एक तेल का रास्ता नहीं है — यह राजनीति, युद्ध और ऊर्जा का एक जटिल जाल है।

  • जब देश आपस में मिलकर काम करते हैं, तो यह पाइपलाइन “दोस्ती” का प्रतीक है।
  • लेकिन जब युद्ध और राजनीति आती है, तो यही पाइपलाइन विवाद का कारण बन जाती है।

यूरोप इस विवाद से यह सीख रहा है कि एक ही देश पर ऊर्जा के लिए निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।

मुख्य तथ्य — एक नज़र में

विषयजानकारी
पाइपलाइन का नामद्रुज्बा (Druzhba)
अर्थदोस्ती (Friendship)
लंबाई4,000+ किलोमीटर
शुरुआत1964
शुरुआती स्थानअल्मेत्येव्स्क, रूस (Tatarstan)
जुड़े देशरूस, बेलारूस, यूक्रेन, पोलैंड, जर्मनी, हंगरी, स्लोवाकिया, चेक गणराज्य
वर्तमान संकटजनवरी 2026 से हंगरी-स्लोवाकिया को तेल बंद
कारणयूक्रेन के पास रूसी हमले से पाइपलाइन टूटी

निष्कर्ष

द्रुज्बा पाइपलाइन 60 से ज्यादा साल पुरानी है लेकिन आज भी यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। 2026 में यह पाइपलाइन सिर्फ एक तेल की नली नहीं, बल्कि यूरोप की राजनीति, यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बन गई है।

युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि दुनिया में ऊर्जा सिर्फ पेट्रोल या बिजली का मामला नहीं है — यह ताकत, दोस्ती और दुश्मनी का भी खेल है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!

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