सबसे पहले, आइए कल की बात करें—बाज़ार में इतनी तेज़ी क्यों आई?
8 अप्रैल, 2026 को शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली। सेंसेक्स लगभग 2,983 अंक उछलकर 77,600 के स्तर के करीब पहुँच गया, जबकि निफ्टी 889 अंक की छलांग लगाकर 24,013 पर बंद हुआ। इस तेज़ी की वजह अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम (ceasefire) की घोषणा थी। इस ख़बर से दुनिया भर के बाज़ारों में आशावाद की एक लहर दौड़ गई। तेल की कीमतें 15 प्रतिशत तक गिर गईं—जो भारत जैसे देशों के लिए बहुत अच्छी ख़बर है।
तो, आज क्या हुआ?
9 अप्रैल की सुबह जैसे ही बाज़ार खुला, बिकवाली की एक लहर शुरू हो गई। सेंसेक्स लगभग 700–900 अंक गिर गया, और निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस बदलाव की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रात में दिया गया एक बयान था; उन्होंने घोषणा की कि जब तक कोई पक्का समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान के साथ तनाव कम नहीं होगा। उन्होंने अपनी सेना को भी हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया। नतीजतन, बाज़ार का पूरा माहौल रातों-रात पूरी तरह से बदल गया।

जिन लोगों ने कल मुनाफ़ा कमाया था, उन्होंने आज अपने शेयर बेचकर उसे भुना लिया—इस प्रक्रिया को ‘प्रॉफिट बुकिंग’ कहा जाता है। जब भी बाज़ार में तेज़ी से उछाल आता है, तो उसके बाद अक्सर थोड़ी-बहुत गिरावट या करेक्शन देखने को मिलता है।
गिरावट के मुख्य कारण
1. ट्रंप के बयान से सीज़फ़ायर पर संदेह बढ़ा
जैसे ही ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जारी रह सकता है, एशियाई बाज़ारों में घबराहट फैल गई। जापान, हांगकांग और अन्य देशों के बाज़ार भी लाल निशान में चले गए, जिसका असर भारत में भी महसूस किया गया।
2. विदेशी निवेशकों ने फिर बिकवाली की: FII की बिकवाली जारी
कल भी—जब बाज़ार काफ़ी ऊँचे स्तर पर कारोबार कर रहा था—विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹28.12 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पता चलता है कि बड़े विदेशी निवेशकों को अभी भी भारतीय बाज़ार पर पूरा भरोसा नहीं है; वे फ़िलहाल “सावधानी” की नीति अपना रहे हैं।
3. तेल की क़ीमतें फिर बढ़ीं
कच्चा तेल, जो कल नरम पड़ा था, आज फिर चढ़ गया। ब्रेंट क्रूड, जो $90 के स्तर तक गिर गया था, फिर से ऊपर उठने लगा। तेल की बढ़ती क़ीमतों से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ जाती है, जिससे उनके मुनाफ़े का मार्जिन कम हो जाता है।
4. कमाई के नतीजों का इंतज़ार
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही (Q4) के कमाई के नतीजे जल्द ही आने वाले हैं। जाने-माने विश्लेषकों का अनुमान है कि कंपनियों की कमाई बहुत शानदार नहीं रहेगी; निफ़्टी 50 कंपनियों की कमाई में सिर्फ़ 2.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी का अनुमान है। यह भी एक वजह है कि निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं।
कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
आज बैंकिंग, FMCG (रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियां), रियल एस्टेट और फार्मा सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा गिरे। Sun Pharma, IndiGo, Adani Ports जैसे बड़े नाम भी लाल निशान में रहे। मिड-कैप और स्मॉल-कैप यानी छोटी कंपनियों के शेयरों में भी 2-3 फीसदी की गिरावट देखी गई।
आम निवेशक क्या करें?
अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, तो इस तरह की गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है। Morgan Stanley जैसी बड़ी विदेशी कंपनी का अनुमान है कि सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक 95,000 तक पहुंच सकता है। Nomura का कहना है कि बाजार अभी अनिश्चित है, लेकिन 2026 के अंत तक अच्छा रिटर्न मिल सकता है। इसलिए सोच-समझकर, बिना घबराए फैसला लें।
आगे क्या होगा?
बाजार के जानकारों का कहना है कि अभी कुछ दिन बाजार ऐसे ही ऊपर-नीचे होता रहेगा। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई पक्का समझौता नहीं होता, तब तक तेल के दाम और शेयर बाजार दोनों डगमगाते रहेंगे। हॉर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही अभी भी सामान्य से बहुत कम है, जिससे तनाव बना हुआ है।
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