प्रकाशित समय : सुबह
चीन ने हाल ही में अपनी सैन्य महत्वाकांक्षाओं का एक ऐसा खाका पेश किया है जो किसी विज्ञान-कथा (Science Fiction) जैसा प्रतीत होता है। ‘लुआननियाओ’ (Luanniao) नाम का यह प्रस्तावित अंतरिक्ष विमानवाहक पोत (Space Aircraft Carrier) न केवल आकार में विशाल है, बल्कि यह भविष्य के युद्धक्षेत्र को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।
मुख्य विशेषताएं और डिजाइन
- वजन और आकार: इस विशालकाय पोत का अनुमानित वजन लगभग 120,000 टन है, जो दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक विमानवाहक पोत ‘यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड’ से भी लगभग 20% अधिक है। इसकी लंबाई 242 मीटर और पंखों का फैलाव (Wingspan) 684 मीटर से अधिक बताया गया है।
- तुलना: यह आकार में इतना बड़ा है कि इसे अक्सर “स्टार वार्स” फिल्मों के जहाजों से जोड़ा जा रहा है।

क्या चीन 1,20,000 टन वजनी अंतरिक्ष विमानवाहक पोत के साथ युद्ध का चेहरा बदलने वाला है? 88 हाइपरसोनिक ‘शुआन नू’ ड्रोन्स से लैस यह ‘मेगा-शिप’ विज्ञान-कथा को हकीकत में बदल रहा है। क्या यह सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है या अंतरिक्ष में चीन का दबदबा? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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88 ‘शुआन नू’ (Xuan Nu) ड्रोन का दस्ता
इस अंतरिक्ष पोत की सबसे बड़ी शक्ति इसमें तैनात होने वाले 88 ‘शुआन नू’ (Xuan Nu) स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू विमान (Drones) होंगे।
- ये ड्रोन हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस होंगे।
- ये वायुमंडल के ऊपरी हिस्सों में उड़ान भरने और वहां से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होंगे।
- पारंपरिक हवाई रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) की पहुंच से बाहर होने के कारण इन्हें रोकना लगभग असंभव होगा।
‘नानतियानमेन’ (Nantianmen) प्रोजेक्ट का हिस्सा
लुआननियाओ चीन के व्यापक ‘नानतियानमेन प्रोजेक्ट’ (South Heavenly Gate) का केंद्र बिंदु है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अंतरिक्ष और वायु रक्षा प्रणालियों को एकीकृत करना है। चीन का लक्ष्य अगले 20 से 30 वर्षों (लगभग 2045-2055 तक) में इसे परिचालन में लाना है।
रणनीतिक उद्देश्य और विशेषज्ञ राय
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा के पीछे चीन का उद्देश्य अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करना और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है।
- ग्लोबल रीच: यह पोत दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी मौसम की स्थिति से ऊपर रहकर तैनात हो सकता है।
- चुनौतियां: हालांकि यह विचार रोमांचक है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे फिलहाल ‘प्रचार’ (Propaganda) मान रहे हैं। 120,000 टन के ढांचे को अंतरिक्ष की निचली कक्षा या स्ट्रैटोस्फीयर में बनाए रखने के लिए जिस ऊर्जा और प्रणोदन (Propulsion) तकनीक की आवश्यकता है, वह वर्तमान में विज्ञान की सीमाओं से परे लगती है।
निष्कर्ष: चाहे यह हकीकत बने या केवल एक भविष्यवादी कल्पना, ‘लुआननियाओ’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन अब केवल जमीन और समुद्र तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह अंतरिक्ष को अगले युद्धक्षेत्र के रूप में देख रहा है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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