DLF के प्रीमियम फ्लैट्स में न बिजली, न पानी — सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का दिया आदेश, रियल एस्टेट में हड़कंप

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प्रकाशित समय : सुबह

देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक DLF के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए CBI जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला गुरुग्राम स्थित DLF के प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट “The Primus DLF Garden City” (सेक्टर 82A) से जुड़ा है, जहां घर खरीदारों को वादे के बावजूद न स्थायी बिजली कनेक्शन मिला, न पानी — और न ही पक्की सड़क।

DLF ने मई 2012 में गुरुग्राम के सेक्टर 82A में यह प्रोजेक्ट लॉन्च किया था। बिल्डर ने खरीदारों से वादा किया था कि फरवरी 2016 तक फ्लैट्स की डिलीवरी कर दी जाएगी। लेकिन डेडलाइन आई और गई — फ्लैट अधूरे रहे।

अक्टूबर 2016 में बिल्डर को महज एक आंशिक अधिभोग प्रमाण-पत्र (Partial Occupation Certificate) मिला। इसके बावजूद प्रोजेक्ट में न स्थायी बिजली कनेक्शन दिया गया, न स्थायी पानी कनेक्शन था, और 24 मीटर चौड़ी एक्सेस रोड जिसका वादा किया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं थी। घर खरीदारों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर इन “प्रीमियम” फ्लैट्स में निवेश किया था — और उन्हें बदले में मिली सिर्फ निराशा।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की इमारत, DLF प्रीमियम फ्लैट्स CBI जांच आदेश 2026
DLF के प्रीमियम फ्लैट्स में न बिजली, न पानी — सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया। रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप।

खरीदारों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज की। 2023 में NCDRC ने उनकी याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए माना कि बिल्डर ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया। लेकिन खरीदार इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि “यह तो बस हिमशैल की नोक भर हो सकती है। हमें नहीं लगता कि यह कोई अकेली घटना है। हम संगठित रियल एस्टेट क्षेत्र में ऐसी घटनाओं से आम उपभोक्ताओं की दुर्दशा की कल्पना कर सकते हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि “हम न्यायिक संज्ञान लेते हैं कि इस देश में कई लोग अपनी पूरी जिंदगी की पूंजी लगाकर एक छोटा सा घर खरीदने का सपना देखते हैं — खासकर अपने करियर या जीवन के आखिरी पड़ाव पर। फिर भी वे अक्सर अपना यह सपना पूरा नहीं कर पाते।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादों और जमीनी हकीकत के बीच भारी असमानता नजर आती है।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 को दिए अपने आदेश में CBI को निर्देश दिया कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की जाए जो CBI निदेशक की सीधी निगरानी में स्वतंत्र रूप से काम करे। टीम को 25 अप्रैल 2026 तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी होगी और अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी संबंधित व्यक्ति और प्राधिकरण CBI की जांच में पूरा सहयोग करें। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को कोर्ट की सहायता करने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देश के रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मच गई है। यह पहली बार नहीं है जब DLF किसी कानूनी पेचीदगी में फंसी हो, लेकिन सीधे CBI जांच का आदेश — वह भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा — एक बड़ा संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अन्य बिल्डरों पर भी दबाव बढ़ेगा और घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला स्वर्णप्रीत कौर एवं अन्य बनाम DLF होम डेवलपर्स लिमिटेड के नाम से दर्ज है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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