प्रकाशित समय : सुबह
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के हिंडन एयरपोर्ट से हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए बुरी खबर है। पिछले एक साल के भीतर इस एयरपोर्ट से संचालित होने वाली सेवाओं में भारी कटौती देखी गई है। जहाँ ठंड और कोहरे का सीजन शुरू होने से पहले प्रतिदिन 25 उड़ानें संचालित हो रही थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर महज 12 रह गई है। इस गिरावट से एयरपोर्ट प्रशासन और नागरिक उड्डयन विभाग में चिंता बढ़ गई है।
इन प्रमुख शहरों की सेवाएं हुई ठप
हिंडन एयरपोर्ट से पिछले एक साल में कुल 13 रूटों पर सेवाएं बंद हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शहर शामिल हैं:
- प्रमुख शहर: गोवा, कोलकाता, वाराणसी, पटना, जम्मू, चेन्नई और भुवनेश्वर।
- अन्य रूट: भटिंडा, किशनगढ़, जयपुर, लुधियाना और जालंधर।
खास बात यह है कि पिछले साल जिन रूट्स को बड़े धूमधाम के साथ लॉन्च किया गया था, उनमें से अधिकांश अब बंद हो चुके हैं।

आखिर क्यों बंद हो रही हैं उड़ानें?
विशेषज्ञों और एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, फ्लाइट्स कम होने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव: अधिकांश निजी एयरलाइंस कंपनियां आने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) में रुचि दिखा रही हैं और वहां स्लॉट बुक कर चुकी हैं। इस कारण हिंडन से उनका मोहभंग हो रहा है।
- नए डीटीएल (DTL) नियम: मार्च से लागू होने वाले ‘ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ के नए नियमों के कारण एयरलाइंस को अपने पायलटों और क्रू के वर्किंग आवर्स में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे उड़ानों की संख्या सीमित की जा रही है।
- सुरक्षा और कोहरा: सर्दियों के दौरान कोहरे के कारण उड़ानों में होने वाली देरी और सुरक्षा संबंधी कारणों से भी कुछ कंपनियों ने हाथ खींच लिए हैं।
एयरलाइंस की वर्तमान स्थिति
- फ्लाईबिग (FlyBig): इस कंपनी ने लुधियाना और भटिंडा के लिए सेवा शुरू की थी, लेकिन अब कंपनी ने देशभर में अपना परिचालन लगभग बंद कर दिया है, जिससे हिंडन की उड़ानें भी बंद हो गईं।
- इंडिगो (IndiGo): पहले इंडिगो की 8 उड़ानें थीं, जिनमें से अब केवल कुछ ही रूट (जैसे बेंगलुरु और मुंबई) पर संचालन हो रहा है।
- एयर इंडिया एक्सप्रेस: इस कंपनी ने भी अपनी कई सेवाओं को सीमित कर दिया है।
एयरपोर्ट प्रशासन का पक्ष
हिंडन एयरपोर्ट के निदेशक डॉ. चिलका महेश के अनुसार, एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस को पत्र लिखकर सेवाएं बहाल करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, अभी तक एयरलाइंस की ओर से कोई ठोस सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अधिकारियों का कहना है कि जो फ्लाइट्स फिलहाल चल रही हैं, उनमें यात्रियों की संख्या (ऑक्यूपेंसी) 90% तक रहती है, जिससे साफ है कि डिमांड की कमी नहीं है, बल्कि एयरलाइंस की अपनी रणनीतिक वजहें हैं।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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