लहरों से बनेगी बिजली, AI संभालेगा पोर्ट — IIT मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग विभाग के 50 साल पूरे

Posted by

प्रकाशन तिथि: 18 मार्च 2026 | स्रोत: आज तक


विभाग का गौरवशाली सफर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास का ओशन इंजीनियरिंग विभाग अपनी स्वर्ण जयंती यानी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। वर्ष 1977 में स्थापित यह विभाग आज भारत की समुद्री ताकत और ब्लू इकोनॉमी का सबसे बड़ा शैक्षणिक केंद्र बन चुका है।


देश के इकलौते विशेष कोर्स

IIT मद्रास और IIT खड़गपुर — ये देश के केवल दो संस्थान हैं जो समुद्री इंजीनियरिंग में विशेष स्नातक (Undergraduate) कार्यक्रम संचालित करते हैं। पिछले पाँच दशकों में इस विभाग ने न केवल कुशल इंजीनियर तैयार किए, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत ऐसी स्वदेशी तकनीकें भी विकसित कीं जिनसे देश की विदेशी निर्भरता काफी हद तक कम हुई है।


AI और हरित ऊर्जा पर जोर

IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि के अनुसार, विभाग अब निम्नलिखित क्षेत्रों में अग्रणी कार्य कर रहा है:

  • समुद्री तरंगों से बिजली उत्पादन (Wave Energy)
  • तटीय कटाव से बचाव की उन्नत तकनीकें
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन और समाधान
IIT मद्रास ओशन इंजीनियरिंग विभाग की 50वीं वर्षगांठ — समुद्री इंजीनियरिंग, वेव एनर्जी और AI तकनीक का केंद्र
लहरों की ताकत से बिजली, AI से पोर्ट मैनेजमेंट — IIT मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग विभाग को 50 साल पूरे, जानें क्या हैं फ्यूचर कोर्सेज और करियर के मौके।

भविष्य में यहाँ के पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि समुद्र की गहराइयों को और बेहतर तरीके से समझा जा सके।


प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान

चिल्का झील का संरक्षण

ओडिशा की चिल्का झील में समुद्री मुहाना (Estuary) डिज़ाइन करने में इस विभाग के शोधकर्ताओं की अहम भूमिका रही। इस कार्य से झील का पारिस्थितिक तंत्र बेहतर हुआ और दुर्लभ इरावदी डॉल्फ़िनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

पुडुचेरी तटरक्षा

पुडुचेरी के तट को समुद्री कटाव से बचाने के लिए एक कृत्रिम रीफ (Artificial Reef) प्रणाली विकसित की गई, जो तटीय संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

विझिंजम बंदरगाह

केरल के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय सीपोर्ट को व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयुक्त घोषित करने में IIT मद्रास ने मुख्य भूमिका निभाई।

ISRO और भारतीय नौसेना के साथ सहयोग

  • अंतरिक्ष से लौटने वाले कैप्सूल/मॉड्यूल की परीक्षण प्रक्रिया में सहयोग
  • भारतीय नौसेना के जहाजों के डिज़ाइन में तकनीकी मार्गदर्शन

एशिया की सबसे आधुनिक प्रयोगशाला

IIT मद्रास में एशिया का सबसे बड़ा वेव बेसिन (Wave Basin) स्थित है, जहाँ समुद्री तरंगों और उनके प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही यहाँ एक 360-डिग्री शिप सिम्युलेटर भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से:

  • जहाज चालन (Ship Navigation) का प्रशिक्षण
  • बंदरगाह प्रबंधन (Port Management) की तकनीकी ट्रेनिंग

प्रदान की जाती है।

करियर के सुनहरे अवसर

वर्तमान में इस विभाग में लगभग 600 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। यहाँ से निकले छात्र निम्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नाम कमा रहे हैं:

क्षेत्रविवरण
नेवल आर्किटेक्चरजहाज निर्माण और डिज़ाइन
पेट्रोलियम इंजीनियरिंगअपतटीय तेल अन्वेषण
ओशन टेक्नोलॉजीसमुद्री तकनीक एवं शोध

QS वर्ल्ड रैंकिंग में IIT मद्रास का पेट्रोलियम इंजीनियरिंग प्रोग्राम विश्व में 31वें स्थान पर है — यह इस विभाग की वैश्विक साख का प्रमाण है।


निष्कर्ष

IIT मद्रास का ओशन इंजीनियरिंग विभाग केवल एक शैक्षणिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की समुद्री नीति, तटीय सुरक्षा, ऊर्जा भविष्य और राष्ट्रीय रक्षा की धुरी बन चुका है। आने वाले दशकों में AI और हरित ऊर्जा के समावेश से यह विभाग और भी अधिक प्रासंगिक एवं शक्तिशाली होगा।


यह लेख आज तक की मूल रिपोर्ट पर आधारित है। मूल स्रोत: AajTak.in

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!

यह भी पढ़ें  

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: उद्घाटन की संभावित तारीखें तय, पीएम मोदी करेंगे जनसभा को संबोधित

नोएडा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन की तैयारी में बना जर्मन शैली का हैंगर, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा को संबोधित करेंगे
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) — पीएम मोदी 28-29 मार्च को करेंगे उद्घाटन, 10 शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *