प्रकाशित समय : सुबह
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) को दुनिया की सबसे घातक हवाई शक्ति बनाने के लिए केंद्र सरकार एक और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है। राफेल (Rafale) की सफलता के बाद अब भारत और फ्रांस के बीच 6वीं पीढ़ी (6th Generation) के लड़ाकू विमान को लेकर एक महा-साझेदारी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यह डील करीब 10 लाख करोड़ रुपये (100 बिलियन यूरो) के ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ (FCAS) प्रोग्राम से जुड़ी हो सकती है।
क्या है 10 लाख करोड़ का FCAS प्रोग्राम?
FCAS यानी ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ यूरोप का सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट है। इसे वर्तमान में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन मिलकर विकसित कर रहे हैं। इसका लक्ष्य 2040 तक राफेल और यूरोफाइटर टाइफून की जगह लेने वाला एक ऐसा फाइटर जेट तैयार करना है, जो न केवल दुश्मन के रडार से अदृश्य (Stealth) होगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन्स की एक पूरी फौज (Loyal Wingman) को नियंत्रित करने में सक्षम होगा।

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भारत की एंट्री से क्यों मचेगी खलबली?
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, FCAS प्रोग्राम में वर्तमान में फ्रांस की कंपनी ‘डसॉल्ट’ (Dassault) और जर्मनी की ‘एयरबस’ (Airbus) के बीच डिजाइन और नेतृत्व को लेकर कुछ मतभेद चल रहे हैं। ऐसे में फ्रांस एक मजबूत और भरोसेमंद पार्टनर की तलाश में है। भारत ने संकेत दिए हैं कि यदि फ्रांस-जर्मनी की साझेदारी में दरार आती है, तो नई दिल्ली इस 6वीं पीढ़ी के प्रोजेक्ट में सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन के लिए तैयार है।
तेजस, AMCA और सुखोई से कैसे अलग होगा यह जेट?
- न्यू जनरेशन फाइटर (NGF): यह जेट सुखोई-57 और अमेरिकी F-22 रैप्टर की श्रेणी का होगा। इसका वजन करीब 30 से 32 टन हो सकता है, जो राफेल से कहीं ज्यादा शक्तिशाली होगा।
- 5th Gen से 6th Gen की छलांग: भारत पहले से ही अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) बना रहा है। 6वीं पीढ़ी के इस प्रोग्राम में शामिल होने से भारत को लेजर हथियार, उन्नत इंजन तकनीक और क्लाउड नेटवर्किंग जैसी फ्यूचरिस्टिक तकनीकें मिलेंगी।
- इंजन में आत्मनिर्भरता: फ्रांस की कंपनी ‘सफ्रान’ (Safran) पहले से ही भारत के AMCA के लिए 120 किलोन्यूटन का इंजन बनाने के लिए बातचीत कर रही है। FCAS में साझेदारी इस सहयोग को अगले स्तर पर ले जाएगी।
राफेल डील और 6वीं पीढ़ी का कनेक्शन
भारत वर्तमान में 114 मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों (MRFA) की खरीद प्रक्रिया में है, जिसमें राफेल सबसे आगे माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बड़ी डील के साथ फ्रांस भारत को 6वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में ‘प्रायोरिटी पार्टनर’ बना सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास 6वीं पीढ़ी की तकनीक होगी।
निष्कर्ष
चीन द्वारा अपने 6वीं पीढ़ी के विमानों पर काम तेज करने के बीच, भारत और फ्रांस की यह संभावित जुगलबंदी एशिया में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है। यह न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब भी बना देगा।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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