इंडोनेशिया को क्यों मिल रहा है विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है?

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प्रकाशित समय : सुबह

जकार्ता: इंडोनेशिया द्वारा अपना पहला विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) संचालित करने के निर्णय ने विशेषज्ञों को दो गुटों में बाँट दिया है। जहाँ कुछ विश्लेषक इसे रणनीतिक रूप से आवश्यक मान रहे हैं, वहीं अन्य चेतावनी दे रहे हैं कि यह एक बेहद महंगा “प्रतीक” बनकर रह सकता है।

हाल ही में जकार्ता ने घोषणा की कि वह इटली सरकार से अनुदान (Grant) के रूप में ‘ज्यूसेपे गैरीबाल्डी’ (Giuseppe Garibaldi) विमानवाहक पोत प्राप्त करेगा। यह जहाज 1985 से 2024 तक इतालवी नौसेना में अपनी सेवाएँ दे चुका है। उम्मीद है कि यह 5 अक्टूबर को इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बल की वर्षगांठ से पहले देश पहुँच जाएगा।

विस्तृत विवरण: समुद्र में चलते हुए इतालवी निर्मित 'ज्यूसेपे गैरीबाल्डी' विमानवाहक पोत का दृश्य, जिसे इंडोनेशियाई नौसेना द्वारा अधिग्रहित किया जा रहा है।
🇮🇩 इंडोनेशिया का पहला विमानवाहक पोत: क्या ‘ज्यूसेपे गैरीबाल्डी’ जकार्ता की समुद्री शक्ति को बदल देगा? जानिए इस रणनीतिक सौदे के पीछे की पूरी कहानी।

क्षेत्रीय शक्ति संतुलन

इस अधिग्रहण के साथ ही इंडोनेशिया, थाईलैंड के बाद विमानवाहक पोत संचालित करने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा देश बन जाएगा। पूरे एशिया में वर्तमान में केवल चीन, भारत और जापान के पास ही अपने विमानवाहक पोत हैं।

यह कदम राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और सैन्य क्षमताओं के विस्तार के व्यापक अभियान का हिस्सा है। रक्षा मंत्री (2019-2024) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, प्रबोवो ने फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम और युद्धपोतों की खरीद की निगरानी की थी। हालाँकि, विमानवाहक पोत हासिल करने का विचार 2024 के अंत में उनके राष्ट्रपति बनने के बाद ही सामने आया।

क्या यह इंडोनेशिया के लिए जरूरी है?

कई विश्लेषकों का तर्क है कि इंडोनेशिया एक विशाल द्वीपसमूह राष्ट्र है, जिसके पास कई रणनीतिक जलमार्ग हैं। इसकी भौगोलिक स्थिति ही एक विमानवाहक पोत की आवश्यकता को सही ठहराती है।

ज्यूसेपे गैरीबाल्डी का उपयोग कैसे होगा?

  • रणनीतिक क्षमता: 180 मीटर लंबे इस जहाज को मुख्य रूप से हेलीकॉप्टरों और ‘वर्टिकल लैंडिंग’ करने वाले विमानों (जैसे हैरियर या एमवी22 ऑस्प्रे) के लिए डिजाइन किया गया है।
  • लागत: इटली के साथ यह सौदा लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का होगा, जिसमें जहाज की मरम्मत, विदेशी ऋण पैकेज और नए हेलीकॉप्टरों की खरीद शामिल है।
  • सीमाएँ: वर्तमान में इंडोनेशिया के पास वर्टिकली लैंड करने वाले विमान नहीं हैं, जो युद्ध की स्थिति में इसकी भूमिका को सीमित कर सकते हैं। साथ ही, चीन के आधुनिक और विशाल विमानवाहक पोतों के सामने यह 40 साल पुराना जहाज कमजोर साबित हो सकता है।

मानवीय मिशन और निगरानी

इंडोनेशियाई नौसेना के प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने स्पष्ट किया कि इस पोत का प्राथमिक उपयोग मानवीय मिशनों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमें गैर-लड़ाकू सैन्य अभियानों के लिए एक वाहक की आवश्यकता है।”

इस जहाज की रेंज 13,000 किलोमीटर है, जिससे यह आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भारी मात्रा में सहायता पहुँचाने में सक्षम है। इसके अलावा, विश्लेषकों का सुझाव है कि इसका उपयोग ड्रोन तैनात करने के लिए किया जा सकता है, जो अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और समुद्री सीमाओं की निगरानी में मदद करेंगे।

चुनौतियाँ और आलोचना

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विमानवाहक पोत जैसे बड़े और धीमे जहाज आधुनिक मिसाइलों के लिए आसान लक्ष्य होते हैं। आलोचकों का कहना है कि इंडोनेशिया को इस भारी निवेश के बजाय अपनी पनडुब्बी क्षमता या तटीय सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए था।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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