भारत का मानसून होगा और भी अनिश्चित: समुद्र का ‘खारापन’ एल नीनो को बना सकता है और भी घातक

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प्रकाशित समय : सुबह

वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने भारत के भविष्य के मानसून को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शोध के अनुसार, समुद्र के पानी में नमक की मात्रा यानी लवणता (Salinity) में होने वाले बदलाव ‘एल नीनो’ (El Nino) जैसे खतरनाक जलवायु पैटर्न को और अधिक तीव्र बना रहे हैं। इसका सीधा असर भारत की बारिश और खेती पर पड़ सकता है।

क्या है एल नीनो और भारत के लिए यह क्यों है चिंता का विषय?

एल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण होती है। यह हर दो से सात साल में आती है और दुनिया भर में हवा के पैटर्न को बदल देती है। भारत के संदर्भ में, एल नीनो मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे देश में कम बारिश और सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं।

प्रशांत महासागर में एल नीनो पैटर्न और समुद्र की लवणता को दर्शाता मानचित्र।
क्या समुद्र का ‘नमक’ बिगाड़ेगा मानसून का खेल? जानिए एल नीनो पर हुआ नया चौंकाने वाला खुलासा।

इतिहास गवाह है कि कम से कम आधे एल नीनो वर्षों के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश हुई है। साल 2023 का एल नीनो रिकॉर्ड पर पांच सबसे शक्तिशाली एल नीनो में से एक था, जिसके कारण भारत ने 2018 के बाद से अपना सबसे सूखा ‘अगस्त’ देखा। इससे खाद्य उत्पादन में कमी आई और महंगाई में उछाल देखा गया।

समुद्र का नमक कैसे डाल रहा है असर?

ड्यूक यूनिवर्सिटी (Duke University) के शोधकर्ताओं, जिनमें प्रमुख शोधकर्ता शिनेंग हू और सिज़ुआओ लियू शामिल हैं, ने पाया कि समुद्र की लवणता एल नीनो के ‘स्टार्टर’ के रूप में काम करती है।

समुद्र का पानी हर जगह एक जैसा नहीं होता; कहीं यह अधिक खारा होता है तो कहीं कम। अध्ययन के अनुसार, जब पश्चिमी प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में कम खारा (fresh) पानी जमा होता है और दूर के क्षेत्रों में खारा पानी अधिक होता है, तो यह विरोधाभास गर्म पानी को पूर्व की ओर धकेलता है। यही वह प्रक्रिया है जो एल नीनो को सक्रिय और तीव्र बनाती है।

पूर्वानुमान में सुधार की उम्मीद

अब तक, एल नीनो के पूर्वानुमान के लिए मुख्य रूप से समुद्र की सतह के तापमान पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन लवणता को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर जलवायु मॉडल में समुद्र के खारेपन के डेटा को भी शामिल किया जाए, तो एल नीनो की सटीक भविष्यवाणी पहले की जा सकती है।

शोधकर्ता सिज़ुआओ लियू के अनुसार, “लवणता एक महत्वपूर्ण कारक है जिसे भविष्य के मॉडल में शामिल किया जाना चाहिए।” भारत जैसे देश के लिए, जहाँ अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर टिकी है, सटीक पूर्वानुमान का मतलब है कि सरकार और किसान सूखे से निपटने के लिए पहले से बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

2026 के लिए चेतावनी

वर्तमान जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 2026 के उत्तरार्ध में एल नीनो एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। यदि समुद्र की लवणता के कारण यह अधिक शक्तिशाली होता है, तो भारत को अत्यधिक गर्मी, लंबी लू (Heatwaves) और अनियमित मानसून के लिए तैयार रहना होगा।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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