प्रकाशित समय : सुबह
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को हाल ही में 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होनी है। इस बीच, अभिनेता के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल ने इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
14 साल पुराना विवाद व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने साल 2012 में राजपाल यादव की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। यह विवाद पिछले 14 वर्षों से चल रहा है।

‘मैं उनके सामने बच्चों की तरह रोया’ ‘न्यूज पिंच’ के साथ बातचीत में अग्रवाल ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि विवाद के शुरुआती दौर में वह अभिनेता के घर गए थे। उन्होंने कहा, “मैं उनके सामने एक बच्चे की तरह रोया था और उनसे विनती की थी कि वह मेरे पैसे लौटा दें। मैंने उन्हें समझाया था कि जो पैसा मैंने उन्हें उधार दिया है, वह मैंने खुद दूसरों से उधार लेकर दिया था।” अग्रवाल ने राजपाल से बार-बार एक निश्चित तारीख देने का अनुरोध किया था ताकि नया एग्रीमेंट बनाया जा सके।
कैसे हुई शुरुआत? अग्रवाल ने बताया कि उनकी मुलाकात राजपाल यादव से सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया ने करवाई थी। राजपाल ने उन पर दबाव बनाया कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी है और अगर तुरंत आर्थिक मदद नहीं मिली, तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। शुरुआत में अग्रवाल हिचकिचा रहे थे, लेकिन जब राजपाल की पत्नी राधा ने उन्हें भावुक संदेश (Emotional Messages) भेजे, तो वह मदद के लिए तैयार हो गए।
निवेश नहीं, कर्ज था अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह कोई ‘इन्वेस्टमेंट’ नहीं बल्कि एक ‘लोन’ (कर्ज) था। उन्होंने कहा कि आमतौर पर निवेश में व्यक्तिगत गारंटी या पोस्ट-डेटेड चेक नहीं दिए जाते, जबकि राजपाल ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। समझौते में यह भी साफ था कि पैसे की वापसी फिल्म की सफलता, सेंसर सर्टिफिकेट या किसी अन्य बाधा पर निर्भर नहीं करेगी।
धोखाधड़ी और कोर्ट का दरवाजा जब भुगतान की समय सीमा बीत गई, तो राजपाल ने पैसे न होने की बात कही। इसके बाद तीन पूरक समझौते (Supplementary Agreements) हुए और नए चेक जारी किए गए। अग्रवाल ने बताया कि जब फिल्म के म्यूजिक लॉन्च पर अमिताभ बच्चन आए, तब उन्हें एहसास हुआ कि समझौते के अनुसार उन्हें फिल्म की नेगेटिव्स और भुगतान मिल जाना चाहिए था। इसके बाद उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए अदालत का रुख किया।
राजपाल के आश्वासन पर कि फिल्म रिलीज होने के बाद वह पैसे लौटा देंगे, अग्रवाल ने स्टे ऑर्डर हटवा लिया। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही।
चेक बाउंस का सिलसिला साल 2013 तक जब कोई समाधान नहीं निकला, तो अग्रवाल फिर से कोर्ट पहुंचे। अदालती हस्तक्षेप के बाद 10.40 करोड़ रुपये के सेटलमेंट पर सहमति बनी। राजपाल यादव ने भुगतान के लिए कई चेक जारी किए, लेकिन वे सभी बाउंस हो गए, जिसके बाद यह मामला और गंभीर कानूनी प्रक्रिया में फंस गया।
अंत में अग्रवाल ने कहा कि एक व्यवसायी के रूप में उनका एकमात्र उद्देश्य अपना पैसा वापस पाना है। फिलहाल राजपाल यादव अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और कानून की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
स्वतंत्र समाचार प्रकाशक जो वैश्विक मामलों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और सार्वजनिक नीति पर ध्यान केंद्रित करता है – और सब कुछ सत्यापित रिपोर्टिंग के साथ!
यह भी पढ़ें

Leave a Reply