प्रकाशित समय : सुबह
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, दोनों देश ज़ापोरिज्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र (ZNPP) के आसपास एक स्थानीय संघर्षविराम (local ceasefire) के लिए सहमत हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि यह समझौता संयंत्र की महत्वपूर्ण बैकअप पावर लाइन की मरम्मत के लिए किया गया है।
मरम्मत के लिए सुरक्षित गलियारा
IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि यूरोप के इस सबसे बड़े परमाणु संयंत्र को बिजली की आपूर्ति करने वाली 330-किलोवोल्ट (kV) की बैकअप लाइन को बहाल करने के लिए दोनों पक्ष युद्ध रोकने पर राजी हुए हैं। ग्रोसी ने बताया, “मरम्मत दलों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में इलाके में ‘डिमाइनिंग’ (बारूदी सुरंगें हटाने) का काम चल रहा है।”

पावर लाइन कटने से बढ़ा था खतरा
ज़ापोरिज्झिया संयंत्र, जो मार्च 2022 से रूसी सेना के नियंत्रण में है, पिछले कई दिनों से केवल एक मुख्य 750 kV बिजली लाइन पर निर्भर था। इसकी एकमात्र बैकअप लाइन ‘फेरोस्प्लावन-1’ (Ferosplavna-1) 10 फरवरी को सैन्य गतिविधियों के कारण क्षतिग्रस्त होकर कट गई थी। परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, शीतलन प्रणाली (cooling systems) को चालू रखने के लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति अनिवार्य है, अन्यथा परमाणु आपदा का खतरा बढ़ सकता है।
IAEA की मध्यस्थता
यह पहली बार नहीं है जब IAEA ने मरम्मत के लिए ऐसी व्यवस्था की है। एजेंसी ने बताया कि युद्ध के दौरान अब तक कई बार ऐसे अस्थायी संघर्षविराम कराए गए हैं ताकि संयंत्र की सुरक्षा को बरकरार रखा जा सके। ग्रोसी ने जोर देकर कहा कि संयंत्र की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है और सुरक्षा के लिए बैकअप बिजली व्यवस्था का होना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य बिंदु:
- समझौता: IAEA की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच स्थानीय स्तर पर गोलाबारी रोकने पर सहमति।
- उद्देश्य: 330 kV बैकअप पावर लाइन की मरम्मत करना।
- सुरक्षा: मरम्मत कार्य से पहले इलाके से बारूदी सुरंगें हटाई जा रही हैं।
- इतिहास: यह संयंत्र 2022 के आक्रमण की शुरुआत से ही रूसी नियंत्रण में है, लेकिन इसका संचालन यूक्रेनी और रूसी विशेषज्ञों की निगरानी में (IAEA की मौजूदगी के साथ) होता रहा है।
रूस और यूक्रेन दोनों ही अक्सर एक-दूसरे पर संयंत्र के पास गोलाबारी करने और परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते रहे हैं। इस ताजा समझौते को क्षेत्र में एक बड़ी आपदा टालने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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