प्रकाशित समय : सुबह
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने भारत के कृषि और खाद्य निर्यात क्षेत्र को गहरी चिंता में डाल दिया है। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को लगभग 11.8 अरब डॉलर (करीब ₹97,000 करोड़) के कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात किए, जो देश के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है। अब यह पूरा व्यापार युद्ध की आग में झुलसने के कगार पर है।
बासमती चावल से लेकर केले तक — सब फंसा
भारतीय बंदरगाहों पर संकट का असर साफ दिखने लगा है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल के अनुसार, 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक बासमती चावल — जो निर्यात के लिए तैयार था — अब जहाज़ों पर फंसा है या बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। इस कारण घरेलू बाज़ार में बासमती के भाव 7 से 10 प्रतिशत तक गिर गए हैं।

ईरान भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि खाड़ी देश मिलकर भारत के प्रीमियम चावल निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा खरीदते हैं।
महाराष्ट्र के नासिक से 5,400 टन प्याज़ और पश्चिम एशिया के बाज़ारों के लिए रवाना होने वाले 80 लाख अंडे खराब होने की कगार पर हैं। सोलापुर से अकेले 1,200 कंटेनर केले कोल्ड स्टोरेज में बंद हैं, जिनसे किसानों को प्रतिदिन ₹8,500 प्रति कंटेनर डेमरेज चार्ज का बोझ उठाना पड़ रहा है।
समुद्री मार्ग बाधित, माल-भाड़ा और बीमा की दरें आसमान पर
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने APEDA को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि अंतरराष्ट्रीय माल-भाड़ा दरें 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। युद्ध जोखिम अधिभार और बीमा प्रीमियम में भी भारी उछाल आई है। समुद्री ईंधन की कीमतें लगभग $520 प्रति टन से बढ़कर $580 प्रति टन हो गई हैं।
बासमती के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार भाव में $50 प्रति टन की गिरावट आई है, जबकि शिपिंग लागत में $200 प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है।
निर्यात किन-किन उत्पादों पर असर
| उत्पाद | निर्यात मूल्य (2025) | पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| अनाज, फल, सब्जियां, मसाले | $7.48 अरब | 29.2% |
| मांस, मछली, डेयरी उत्पाद | $1.81 अरब | बड़ा हिस्सा |
| कॉफी | $240.7 करोड़ | 17.7% |
| चाय | $410.1 करोड़ | 44.1% |
| जायफल, इलायची, मसाले | $295.5 करोड़ | 70.5% |
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के भैंस मांस प्रसंस्करण उद्योग; आंध्र प्रदेश, गुजरात और केरल के झींगा निर्यातक; तथा कर्नाटक, केरल, असम और पश्चिम बंगाल के चाय और कॉफी उत्पादक — सभी इस संकट की चपेट में हैं।
उर्वरक आपूर्ति पर भी संकट
संकट केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। भारत अपनी कृषि की रीढ़ — उर्वरक — का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है:
- यूरिया का 70% खाड़ी देशों से
- DAP का 42% इसी क्षेत्र से
- अमोनिया का 83% GCC देशों से
StoneX के उर्वरक विश्लेषक जोश लिनविल के अनुसार, युद्ध के कारण दुनिया के तीन सबसे बड़े यूरिया और अमोनिया निर्यातक — कतर, ईरान और सऊदी अरब — प्रभावी रूप से बाज़ार से बाहर हो गए हैं। घरेलू स्तर पर तीन उर्वरक संयंत्रों ने कतर से LNG आपूर्ति घटने के कारण यूरिया उत्पादन कम कर दिया है।
तेल की कीमतें और रुपये पर दबाव
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 90 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें करीब आधा हिस्सा खाड़ी से आता है। युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड लगभग $65-67 प्रति बैरल से बढ़कर $80-82 प्रति बैरल तक पहुंच गया है — यानी करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि।
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर रुकावट जारी रही तो कीमतें $100 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई में 0.8 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया और किसानों को राहत की मांग
केंद्र सरकार ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, वैकल्पिक कच्चे तेल स्रोतों और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समीक्षा की।
ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने मांग की है कि:
- NAFED और FCI प्याज़, केले और अंगूर जैसी सड़नशील वस्तुएं तत्काल समर्थन मूल्य पर खरीदें (प्याज़ के लिए न्यूनतम ₹35/किलो, केले के लिए ₹25/किलो)
- प्याज़ और अटकी फसलों पर ₹2,500 प्रति क्विंटल की तत्काल सब्सिडी दी जाए
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि किसान खरीफ की तैयारी बिना घबराए जारी रखें।
क्या विकल्प हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में सऊदी अरब और पश्चिमी समुद्री मार्ग से निर्यात किया जा सकता है। ईरान ने संकेत दिया है कि भारत उसके शत्रु देशों की सूची में नहीं है और भारत के क्षेत्र में संतुलित राजनयिक संबंध इसमें मददगार हो सकते हैं।
हालांकि, यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो देश की खाद्य मुद्रास्फीति, किसानों की आय और निर्यात आय — तीनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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