प्रकाशित समय : सुबह
कर्नाटक के मंड्या जिले के मद्दूर में स्थित शिमशा सहकारा बैंक नियमिता (Shimsha Sahakara Bank Niyamitha) का बैंकिंग लाइसेंस अब पूरी तरह और स्थायी रूप से रद्द हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 5 मार्च 2026 को जारी अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की पुष्टि की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब दो साल पुराना है। RBI ने 5 जुलाई 2024 को पहली बार इस बैंक का लाइसेंस रद्द किया था। इसकी वजह थी बैंक की बेहद खराब वित्तीय स्थिति — बैंक का आकलित CRAR (पूंजी पर्याप्तता अनुपात) -79.74% तक पहुंच चुका था, नेट वर्थ -4.67 करोड़ रुपये हो गई थी और जमाराशि में 19.61% की गिरावट दर्ज की गई थी। RBI का स्पष्ट मत था कि बैंक अपने मौजूदा जमाकर्ताओं को पूरा भुगतान करने में सक्षम नहीं है।

उस समय बैंक को तत्काल प्रभाव से बैंकिंग कारोबार बंद करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के परिसमापन (winding up) और एक लिक्विडेटर की नियुक्ति का अनुरोध भी किया गया था।
हाईकोर्ट गया था मामला
बैंक ने RBI के इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition No. 19767/2024) दायर कर दी। हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2024 को एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसके चलते RBI की कार्रवाई अस्थायी रूप से रुक गई। इसी कारण बैंक पर लगाए गए प्रतिबंधों की समयसीमा बार-बार बढ़ाई जाती रही — आखिरी बार इसे 24 मई 2026 तक के लिए बढ़ाया गया था।
अब क्या हुआ? — वो अहम मोड़
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बदलाव 17 फरवरी 2026 को आया, जब बैंक ने खुद अपनी याचिका वापस ले ली। कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका को “Dismissed as Withdrawn” घोषित कर दिया। जैसे ही कोर्ट का स्टे हटा, RBI का जुलाई 2024 का मूल आदेश तुरंत प्रभाव से पुनः लागू हो गया। RBI ने 5 मार्च 2026 को इसकी आधिकारिक पुष्टि की।
अब बैंक पर क्या-क्या प्रतिबंध हैं?
बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के तहत शिमशा सहकारा बैंक अब निम्नलिखित कार्य नहीं कर सकता:
- जमा स्वीकार करना बंद: बैंक अब किसी भी ग्राहक से नई जमाराशि नहीं ले सकता।
- निकासी पर रोक: बैंक से किसी भी प्रकार की साधारण निकासी संभव नहीं होगी।
- धारा 5(b) के तहत: बैंक “बैंकिंग व्यवसाय” की परिभाषा में आने वाली कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता।
- धारा 6 के तहत: कोई भी अन्य वित्तीय लेनदेन भी प्रतिबंधित है।
- तत्काल प्रभाव: ये सभी प्रतिबंध तुरंत लागू हो गए हैं।
जमाकर्ताओं के पैसों का क्या होगा?
यह सवाल सबसे जरूरी है। अच्छी खबर यह है कि DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता को ₹5 लाख तक की जमाराशि का बीमा कवर मिलता है।
बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 99.96% जमाकर्ता ऐसे हैं जिनकी पूरी राशि DICGC द्वारा संरक्षित है। 31 मार्च 2024 तक DICGC पहले ही ₹11.85 करोड़ की बीमित जमाराशि का भुगतान कर चुकी थी। अब बैंक का परिसमापन होगा, एक लिक्विडेटर नियुक्त होगा और शेष जमाकर्ताओं को आधिकारिक प्रक्रिया के जरिए उनकी राशि मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. बैंक का लाइसेंस क्यों रद्द हुआ? बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी, कमाई की संभावनाएं नगण्य थीं और वह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की कई शर्तों का पालन करने में विफल रहा था।
Q2. क्या मैं अब पैसे निकाल सकता हूं? सामान्य तरीके से नहीं। लिक्विडेटर की नियुक्ति के बाद आधिकारिक प्रक्रिया के तहत दावा करना होगा।
Q3. क्या मेरा पैसा सुरक्षित है? ₹5 लाख तक की राशि DICGC बीमे के अंतर्गत सुरक्षित है। 99.96% जमाकर्ताओं को पूरी राशि वापस मिलने की उम्मीद है।
Q4. हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया? हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को बैंक की याचिका को वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया।
Q5. यह बैंक कहां स्थित है? मद्दूर, मंड्या जिला, कर्नाटक।
निष्कर्ष
शिमशा सहकारा बैंक के खिलाफ RBI की यह कार्रवाई बैंकिंग क्षेत्र में नियामकीय अनुशासन की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करती है। कोर्ट की लंबी प्रक्रिया के बाद अंततः नियमों की जीत हुई है। मद्दूर और मंड्या के स्थानीय ग्राहकों के लिए यह निस्संदेह एक बड़ा झटका है, लेकिन DICGC की सुरक्षा व्यवस्था के चलते अधिकांश जमाकर्ताओं को उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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