क्या हुआ था?
5 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ी खबर दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पहाड़ों में फंसे एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। यह अधिकारी एक कर्नल थे जो अमेरिका-ईरान युद्ध में हिस्सा ले रहे थे।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा — “WE GOT HIM!” यानी “हम उसे ले आए!”

विमान कैसे गिराया गया?
3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को अमेरिकी वायुसेना का एक F-15E लड़ाकू विमान पश्चिमी ईरान के ऊपर उड़ रहा था। ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने इसे मार गिराया। यह विमान दो लोगों का था। दोनों ने इजेक्ट किया यानी विमान से कूद गए।
पहले सदस्य को शुक्रवार को ही बचा लिया गया। दूसरे सदस्य — एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (हथियार संचालक) — की खोज जारी रही। वह ईरान के पहाड़ों में छिपे हुए थे। उनके आसपास ईरानी दुश्मन उन्हें ढूंढ रहे थे।
36 घंटे की जिंदगी और मौत की लड़ाई
इस अधिकारी ने 36 घंटे से ज्यादा समय तक ईरान के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में खुद को छिपाए रखा। वे घायल थे, लेकिन चल सकते थे। उनके पास बहुत कम खाना और पानी था।
ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान सरकार ने इस अधिकारी को पकड़ने के लिए इनाम की घोषणा की थी। स्थानीय लोग भी उन्हें ढूंढने में लगे थे। वहीं, अमेरिकी सेना उनके इमरजेंसी बीकन (एक संकेत देने वाला यंत्र) की मदद से उनकी जगह का पता लगा रही थी।
CIA ने कैसे मदद की?
रिपोर्टों के मुताबिक, CIA यानी अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने इस ऑपरेशन में बड़ी भूमिका निभाई। CIA ने ईरान के अंदर एक झूठी खबर फैलाई — यह बताया गया कि अमेरिका ने अधिकारी को पहले ही ढूंढ लिया है और वे जमीन पर आगे बढ़ रहे हैं। इससे ईरानी सेना भ्रमित हो गई।
इसी दौरान CIA ने अपनी खास क्षमताओं से उस अधिकारी की सटीक जगह पता लगाई। वे एक पहाड़ी दरार में छिपे थे। यह जानकारी तुरंत व्हाइट हाउस और रक्षा विभाग (Pentagon) को दी गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे हुआ?
राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे जो दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों से लैस थे। विशेष कमांडो दल को ईरान की जमीन पर उतारा गया। बड़ी संख्या में हवाई कवर दिया गया।
इस ऑपरेशन में दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर पर ईरानी आदिवासियों ने गोलियां चलाईं, लेकिन दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित अपने बेस पर वापस आ गए। अंततः अधिकारी को ईरान की जमीन से सुरक्षित निकाल लिया गया।
ट्रम्प ने कहा — “एक भी अमेरिकी सैनिक इस ऑपरेशन में नहीं मरा।”
ट्रम्प ने क्या कहा?
ट्रम्प ने Truth Social पर लिखा:
“यह बहादुर योद्धा दुश्मन की जमीन पर ईरान के खतरनाक पहाड़ों में था। दुश्मन उसे हर घंटे और करीब आकर ढूंढ रहे थे। लेकिन वह कभी अकेला नहीं था — उसके कमांडर-इन-चीफ और साथी सैनिक 24 घंटे उसकी जगह पर नजर रखे थे।”
ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यह “पहली बार है जब दो अमेरिकी पायलट दुश्मन की गहरी जमीन से अलग-अलग ऑपरेशन में बचाए गए।”
पहला पायलट कैसे बचाया गया था?
पहले क्रू मेंबर — F-15E का मुख्य पायलट — को शुक्रवार (3 अप्रैल) को ही दो सैन्य हेलीकॉप्टरों की मदद से बचा लिया गया था। हालांकि उस दौरान बचाव हेलीकॉप्टर पर गोली भी लगी थी, जिसमें कुछ सैनिक घायल हुए। लेकिन हेलीकॉप्टर सुरक्षित वापस आ गया।
अमेरिका ने इस पहले रेस्क्यू की जानकारी दूसरे ऑपरेशन के पूरा होने तक नहीं दी क्योंकि वे दूसरे ऑपरेशन को खतरे में नहीं डालना चाहते थे।
A-10 वॉर्थोग का भी मामला
इसी खोज अभियान के दौरान एक A-10 वॉर्थोग लड़ाकू विमान पर भी ईरान ने हमला किया। लेकिन उस पायलट ने विमान को ईरानी सीमा से बाहर निकाला और कुवैत की हवाई सीमा में पहुंचने के बाद बाहर कूदे। उन्हें भी सुरक्षित बचा लिया गया।
अमेरिका-ईरान युद्ध की ताजा स्थिति
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस घटना से पहले भी कई अमेरिकी विमान मार गिराए गए थे:
- 1 मार्च: कुवैत की वायु रक्षा ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 विमान मार गिराए (सभी छह क्रू मेंबर सुरक्षित)।
- 12 मार्च: एक KC-135 ईंधन भरने वाला विमान इराक में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए।
- 3 अप्रैल: F-15E ईरान के ऊपर मार गिराया गया — जो 20 से अधिक वर्षों में पहली बार किसी दुश्मन ने अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराया।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
इस पूरी घटना के बीच एक और बड़ा मुद्दा है — होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने इसे बंद कर दिया है जिससे दुनियाभर में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 141 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है जो 2008 के बाद सबसे ज्यादा है।
ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे में होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों की राय
रिटायर्ड मेजर जनरल मार्क मैककार्ली ने कहा कि यह ऑपरेशन बेहद खतरनाक था। उन्होंने कहा — “वह घायल थे, बहुत कम सामान था, अनजान पहाड़ों में थे, और ईरानी उन्हें ढूंढ रहे थे। इन सब बातों को मिलाकर देखें तो यह बेहद खतरनाक था।”
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल चौधरी ने कहा — “हमारी एक ही सोच होती है — अपने सैनिकों को घर वापस लाना। हम इसके लिए कुछ भी करेंगे। हमारा नारा है — ‘ताकि दूसरे जी सकें।’”
मुख्य बातें
- 3 अप्रैल: अमेरिकी F-15E विमान ईरान ने मार गिराया, दोनों क्रू मेंबर ने इजेक्ट किया।
- 3 अप्रैल: पहले पायलट को उसी दिन बचा लिया गया।
- 3–5 अप्रैल: दूसरा अधिकारी 36 घंटे से अधिक ईरान के पहाड़ों में छिपा रहा।
- 5 अप्रैल (रविवार): CIA की मदद और दर्जनों विमानों के साथ दूसरे अधिकारी को भी बचाया गया।
- कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मरा रेस्क्यू ऑपरेशन में।
- ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू बताया।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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