भारत पर क्यों पड़ा इतना गहरा असर?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक और उपभोक्ता देश है। देश में हर रोज़ लगभग 55 लाख बैरल तेल की ज़रूरत होती है। इसमें से 88% तेल बाहर से मँगाया जाता है।
होर्मुज़ बंद होने से पहले, भारत का 50 से 53% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता था — यानी इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से। जब यह रास्ता बंद हुआ तो भारत को सीधा झटका लगा।
इससे भी ज़्यादा चिंता की बात रसोई गैस यानी LPG को लेकर है। भारत अपनी ज़रूरत का 60% LPG बाहर से मँगाता है, और उसमें से 90% होर्मुज़ के रास्ते ही आता था। देश में करीब 30 करोड़ घरों में LPG सिलेंडर से खाना बनता है।

तेल का भंडार कितने दिनों का है?
जब संकट शुरू हुआ तो कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि भारत के पास सिर्फ 5 से 10 दिन का तेल बचा है। इससे लोगों में घबराहट फैल गई।
लेकिन सच पूरा अलग है। केंद्र सरकार ने साफ़ किया कि देश में दो तरह के तेल भंडार हैं:
- रणनीतिक भंडार (Strategic Petroleum Reserve): यह सरकार द्वारा ज़मीन के नीचे गुफाओं में रखा गया आपातकालीन तेल है। इससे करीब 9 से 10 दिन की ज़रूरत पूरी हो सकती है।
- व्यावसायिक भंडार (Commercial Stock): तेल कंपनियाँ और रिफाइनरियाँ जो तेल रखती हैं, वह करीब 64 दिनों के लिए पर्याप्त है।
इन दोनों को मिलाकर देश के पास कुल 74 दिनों का तेल भंडार है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीज़ल या LPG की कमी नहीं है।
तेल के दाम कितने बढ़े?
होर्मुज़ बंद होने से पहले ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी। संकट शुरू होते ही यह 100 डॉलर से ऊपर चली गई। एक समय यह 166 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुँच गई — जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर था।
भारत का अपना कच्चा तेल टोकरी (Indian Crude Basket) मार्च 2026 में 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया, जो पहले 62 से 70 डॉलर के बीच था।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
संकट को देखते हुए सरकार ने कई तेज़ कदम उठाए:
पेट्रोल-डीज़ल पर राहत: सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर शून्य कर दिया। यह महँगाई से राहत देने के लिए किया गया।
LPG उत्पादन बढ़ाया: देश की रिफाइनरियों को घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया। इससे घरेलू LPG उत्पादन में करीब 25 से 28% की बढ़ोतरी हुई।
नई आपूर्ति के रास्ते: भारत ने अमेरिका, रूस, नॉर्वे और अल्जीरिया जैसे देशों से अधिक तेल खरीदना शुरू किया। मार्च 2026 तक भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल मँगा रहा था।
24 घंटे निगरानी: पूरे देश में तेल भंडार की निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया।
गैस नियंत्रण आदेश: 9 मार्च 2026 को सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी किया। इससे घरेलू PNG और CNG की आपूर्ति सुरक्षित रखी गई, जबकि उद्योगों को सीमित आपूर्ति मिली।
भारत की कूटनीति: ईरान से मिली खास छूट
भारत ने एक अहम कूटनीतिक सफलता हासिल की। ईरान ने भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ से गुज़रने की खास अनुमति दी। मार्च 2026 में दो भारतीय LPG जहाज़ — शिवालिक और नंदा देवी — करीब 92,700 टन LPG लेकर होर्मुज़ पार कर भारत पहुँचे।
ईरान ने इसे भारत-ईरान के बीच पुराने और मज़बूत संबंधों की वजह से दी गई “सद्भावना छूट” बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में कहा कि यह युद्ध वैश्विक ऊर्जा के लिए एक “गंभीर संकट” है, लेकिन भारत के पास पर्याप्त भंडार है और सरकार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है।
खाड़ी देशों से लौटे 3.75 लाख भारतीय
संकट का एक और बड़ा पहलू है — भारत की खाड़ी में रहने वाली बड़ी आबादी। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में करीब 80 से 90 लाख भारतीय काम करते हैं। इनमें से 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय मार्च 2026 तक वापस लौट आए। इनमें कुशल पेशेवर और व्यापारी भी शामिल हैं।
इससे भारत को मिलने वाले विदेशी धन (Remittances) में भी कमी आई है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
रुपये पर भी असर
ऊर्जा आयात का बिल बढ़ने से भारतीय रुपया कमज़ोर हुआ। 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अभी अपनी ब्याज दर 5.25% पर बनाए रखी है, लेकिन महँगाई पर नज़र बनाए हुए है।
दुनिया की प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल अपने आपातकालीन भंडार से निकालने का फ़ैसला किया। यह अब तक का सबसे बड़ा समन्वित आपातकालीन तेल उपयोग था। फिर भी विशेषज्ञों ने इसे “बड़े ज़ख्म पर छोटी पट्टी” बताया क्योंकि यह तेल सिर्फ चार दिनों की वैश्विक खपत के बराबर था।
भारत के लिए सबक: ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरत
यह संकट एक बड़ा सवाल उठाता है — क्या भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए इतना निर्भर रह सकता है?
IEA की सलाह है कि हर देश के पास 90 दिनों के तेल आयात के बराबर भंडार होना चाहिए। भारत अभी इस लक्ष्य से दूर है।
साथ ही यह संकट नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ज़रूरत को भी उजागर करता है। भारत ने 2025 में 18.5 गीगावॉट नई अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी और कुल 180 GW तक पहुँचा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा का है। इस संकट ने उस लक्ष्य को राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत बना दिया है।
संक्षेप में — ज़रूरी बातें
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| होर्मुज़ बंद हुआ | 4 मार्च 2026 |
| युद्ध की शुरुआत | 28 फ़रवरी 2026 |
| भारत का कुल तेल भंडार | करीब 74 दिन |
| ब्रेंट क्रूड की अधिकतम कीमत | 166 डॉलर/बैरल |
| वापस आए भारतीय | 3,75,000+ |
| IEA की आपातकालीन रिलीज़ | 40 करोड़ बैरल |
| LPG उत्पादन में वृद्धि | 25-28% |
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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