राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल केवल केंद्र सरकार का अधिकार — सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला

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नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर टोल वसूलने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। राज्य सरकारें इन राजमार्गों पर कोई टोल नहीं लगा सकतीं।

यह फैसला 4 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने सुनाया।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल केवल केंद्र सरकार का अधिकार — सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला

मामला क्या था?

यह मामला टी.एस.आर. वेंकटरमण बनाम भारत संघ और अन्य (2026 LiveLaw (SC) 326) के नाम से दर्ज हुआ। एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। इस याचिका में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने के अधिकार को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और केंद्र सरकार के अधिकार को सही ठहराया।


कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने माना कि:

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) द्वारा लिया जाने वाला टोल एक शुल्क (fee) है।
  • यह शुल्क संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्र सूची (Union List) के अंतर्गत आता है।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर कानून बनाने और टोल लगाने का अधिकार केवल संसद और केंद्र सरकार के पास है।
  • राज्य सरकारें केवल अपनी सड़कों — यानी राज्य राजमार्गों और जिला सड़कों — पर ही टोल लगा सकती हैं।

संविधान में क्या लिखा है?

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं — केंद्र सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List)।

केंद्र सूची की प्रविष्टि 23 (Entry 23 of List I) के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के अधीन हैं। इसका मतलब यह है कि इन सड़कों पर कानून बनाने और शुल्क लगाने का अधिकार पूरी तरह संसद के पास है।

यदि किसी केंद्रीय कानून और राज्य कानून में टकराव हो, तो अनुच्छेद 246 और अनुच्छेद 254 के अनुसार केंद्रीय कानून ही मान्य होगा।


किस कानून के तहत लगता है टोल?

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूलने का आधार दो केंद्रीय कानून हैं:

1. राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 (National Highways Act, 1956) इस कानून की धारा 7 के तहत केंद्र सरकार को राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों, बाईपास और सुरंगों के उपयोग पर शुल्क लगाने का अधिकार है।

2. राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 (National Highways Fee Rules, 2008) इन नियमों के नियम 3(1) के अनुसार केंद्र सरकार अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर राजमार्गों पर टोल लगा सकती है।


राज्य सरकार टोल क्यों नहीं लगा सकती?

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर राज्य अपनी पुलिस शक्तियों का इस्तेमाल करके केंद्रीय कानून को बाधित नहीं कर सकता।
  • राज्य सरकार केंद्रीय राजमार्गों पर टोल रोकने या बंद करने का आदेश नहीं दे सकती
  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर विधायी और कार्यपालिका शक्ति पूरी तरह संसद और केंद्र सरकार के पास है।

हालाँकि, राज्य अपनी राज्य सड़कों पर टोल लगाने के लिए स्वतंत्र हैं।

NHAI क्या है और टोल क्यों लगता है?

NHAI यानी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार सरकारी संस्था है।

टोल वसूलने का कारण “उपयोगकर्ता भुगतान” (User Pay) का सिद्धांत है — जो लोग सड़क का उपयोग करते हैं, वे उसके निर्माण और रखरखाव का खर्च उठाते हैं। इससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

टोल से मिला पैसा सड़क निर्माण की लागत वसूलने, सड़कों की मरम्मत और रखरखाव, और BOT (बनाओ-चलाओ-सौंपो) परियोजनाओं में काम करता है।


यह फैसला क्यों जरूरी है?

यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो यह समझना चाहते थे कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का अधिकार किसके पास है। कुछ राज्यों में यह विवाद उठा था कि क्या राज्य सरकारें केंद्र के इस अधिकार को चुनौती दे सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को पूरी तरह खत्म करते हुए कहा कि संविधान में यह बात एकदम साफ है — राष्ट्रीय राजमार्ग केंद्र का विषय है।


नागरिकों के अधिकार

हालाँकि, यह फैसला केवल टोल लगाने के अधिकार को लेकर है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट यह भी कह चुका है कि:

  • यदि सड़क खराब हालत में हो, गड्ढों से भरी हो या यातायात जाम रहता हो, तो NHAI टोल नहीं वसूल सकता
  • नागरिकों को टोल देने के बदले सुरक्षित और बाधा-रहित सड़क पाने का अधिकार है।
  • NHAI और नागरिकों के बीच एक सार्वजनिक विश्वास का रिश्ता है — यदि NHAI अपना दायित्व नहीं निभाता, तो टोल वसूलने का अधिकार भी नहीं रहता।

मुकदमे का विवरण

विवरणजानकारी
मामले का नामटी.एस.आर. वेंकटरमण बनाम भारत संघ और अन्य
केस नंबर2026 LiveLaw (SC) 326
पीठन्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान
फैसले की तारीख4 अप्रैल 2026
फैसलाविशेष अनुमति याचिका खारिज
संबंधित कानूनराष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956, राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008
संविधान प्रविष्टिसातवीं अनुसूची, केंद्र सूची, प्रविष्टि 23

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भारत के संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का बंटवारा स्पष्ट है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाना केंद्र सरकार का अधिकार है और राज्य सरकारें इसे चुनौती नहीं दे सकतीं। यह फैसला देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े भविष्य के विवादों के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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