पाकिस्तान इस समय एक बहुत बड़े ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। इसकी मुख्य वजह ईरान पर अमेरिका और इज़रायल का हमला है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इससे होर्मुज़ जलसंधि नामक एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया है, जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। पाकिस्तान अपना अधिकांश तेल खाड़ी देशों से खरीदता है, जो इसी मार्ग से आता है, इसलिए पाकिस्तान में सबसे ज्यादा तकलीफ हुई है।
पेट्रोल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। मार्च 2026 की शुरुआत में, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 266 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन एक महीने के भीतर ही यह कीमत 458 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई, जो कि 72% की वृद्धि है। यह पाकिस्तान के इतिहास में पेट्रोल की सबसे बड़ी एक महीने की वृद्धि है। डीजल की कीमतें भी 520 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं। जब यह खबर आई, तो रावलपिंडी और इस्लामाबाद समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए।

विरोध इतना बड़ा था कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को रात में ही भाषण देना पड़ा और पेट्रोल पर 80 रुपये की छूट का ऐलान करना पड़ा, जिसके बाद कीमत 378 रुपये प्रति लीटर पर आ गई।
सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने एक बड़ी बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें यह फैसला किया गया कि पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और आज़ाद जम्मू-कश्मीर में 7 अप्रैल 2026 से सभी बाजार, दुकानें और मॉल रात 8 बजे तक बंद हो जाएंगे।
खैबर पख्तूनख्वा के बड़े शहरों में थोड़ी राहत दी गई है, जहां बाजार रात 9 बजे तक खुले रह सकते हैं। सिंध प्रांत को अभी इस आदेश से बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां की सरकार अभी दुकानदारों और व्यापारियों से बात कर रही है। रेस्तरां, बेकरी और खाने-पीने की दुकानें रात 10 बजे तक खुली रह सकती हैं।
शादी के हॉल और मार्की भी 10 बजे तक चल सकते हैं, लेकिन घर में भी रात 10 बजे के बाद शादी की महफिल नहीं जमाई जा सकती। दवाइयों की दुकानें यानी मेडिकल स्टोर और फार्मेसी इस नियम से बाहर हैं, वे पहले की तरह खुली रहेंगी। सरकार का कहना है कि इन कदमों से बिजली की मांग में लगभग 1,200 मेगावाट की कमी आएगी।
व्यापारियों में नाराज़गी है, लेकिन सरकार ने गरीबों के लिए कुछ राहत के कदम भी उठाए हैं। मोटरसाइकिल चलाने वालों को हर महीने 20 लीटर पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर की छूट दी जा रही है। छोटे किसानों को फसल के मौसम में 1,500 रुपये प्रति एकड़ की मदद दी जाएगी।
गिलगित और मुज़फ्फराबाद में एक महीने तक शहरों के बीच सार्वजनिक बसें मुफ्त चलाई जाएंगी, जिसका खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। अब तक एक लाख से ज्यादा लोगों को डिजिटल तरीके से तेल सब्सिडी मिल चुकी है।
पाकिस्तान की यह मुश्किल तब तक कम होती नहीं दिखती जब तक होर्मुज़ जलसंधि पर तनाव बना रहेगा और दुनिया में तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी। 24 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 25% लोग पहले से ही गरीबी रेखा से नीचे जी रहे हैं। ऐसे में बिजली और पेट्रोल का यह संकट आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।
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